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हाफिज फरमान हुनर को अकीदत में गूंथ दे रहे पर्यावरण का संदेश

बीकानेर। राजा महाराजा के दौर से ही बीकानेर कारीगरों को शहर है। हालांकि रंगाई और छपाई ने तो व्यवसायिक रूप ले लिया लेकिन इसके अलावा अन्य कलाएं भी कहीं न कहीं अपना रंग दिखाती रहीं। इसी के चलते मोहर्रम और ताजियेदारी में भी कारीगरी और अनूठेपन ने जाने-अनजाने अपनी जगह बना ली।
शहर के मौहल्ला चूनगरान में हाफिज फरमान अली द्वारा सरसों का अनोखा ताजिया बनाया जाता है, यह ताजिया 10 से 12 दिन में बनकर तैयार हो होता है और इसे बनाने में 123 साल से ज्यादा पुरानी परंपरा रही है इस ताजिये को बनाने में मुस्लिम समुदाय के साथ साथ हिंदू भी सहयोग करते हैं और इसे देखने दूर-दूर से लोग मौहल्ला चूनगरान में आते हैं और मन्नतें मांगते हैं।
यहीं कारण है कि बीकानेर में सरसों और बांस के ताजिया जिसे देखते ही आंखों को ठंडक का एहसास होता है। ताजिए की शकल में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देत।
पर्यावरण संरक्षण से प्रेरित होकर मित्र एकता सेवा समिति द्वारा रविवार को ताजिया कारीगर हाफीज फरमान अली का सम्मान किया।
संरक्षक सुनील दत्त नागल ने बताया कि संतोष जी महाराज , पंडित गायत्री प्रसाद शर्मा और पंडित यज्ञ प्रसाद शर्मा के संयुक्त सानिध्य में सेवा समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एनडी कादरी, इंजिनियर कमल कांत सोनी, सचिव सैय्यद अख्तर, भवानी आचार्य, मोहम्मद हक कादरी, मोहम्मद हुसैन डार सहित आदि के द्वारा शॉल ओढ़ाकर ओर माला पहनाकर सम्मानित किया।

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दिलीप गुप्ता

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