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दादा गुरुदेव जिन दत्त सूरी जैसी हस्ती न होती।
तो शायद जिन शासन की इतनी बस्ती न होती-गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा.

बीकानेर, 06 जुलाई। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ के गच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिन मणि प्रभ सूरीश्वरजी महाराज की आज्ञानुवर्ती गणिवर्य श्री मेहुल प्रभ सागर म.सा., मुनि मंथन प्रभ सागर व बाल मुनि मीत प्रभ सागर म.सा. बीकानेर की साध्वीश्री दीपमाला व शंखनिधि के सान्निध्य में ढढ्ढा चौक क्षेत्र की ढढ्ढा कोटड़ी में दादा गुरु जिनदत्त सूरी की स्वर्गारोहण दिवस पर गुणानुवाद सभा हुई। उदयरामसर की दादाबाड़ी में भी भक्ति संगीत के साथ पूजा व प्रसाद का आयोजन किया गया।
गुणानुवाद सभा में गणिवर्य श्री मेहुल प्रभ सागर म.सा ने कहा कि दादा गुरुदेव जिन दत्त सूरी जैसी हस्ती न होती। तो शायद जिन शासन की इतनी बस्ती न होती’’ ने कहा कि दादा गुरुदेव के अनिगिनत उपकार है, जिन्होंने हमारे पूर्वजों को वीर प्रभु का शासन प्रदान किया, जिन शासन उनके उपकारों व ऋण से कभी मुक्त नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि जिन शासन के प्रथम दादा गुरुदेव ने अपने गुणों और चमत्कारों से जीवमात्र का कल्याण किया तथा लाखों लोगों को जैन धर्म में दीक्षित किया। जैन समाज की 52 गोत्रों की स्थापना की। उनके चमत्कारों, उपदेशों के कारण जैन समाज हमेंशा उनको श्रद्धा व सम्मान के साथ याद करता है। अजमेर दादाबाड़ी में आज भी उनका स्थित कलश रखा है, जो जैन तीर्थ के रूप् में प्रतिश्ठित है।
उन्हांने बताया कि जिन शासन की एक महान परम्परा खरतरगच्छ के दादा गुरु युग पुरुश है। जिनेश्वर सूरी से प्रारंभ हुई इस परम्परा में नवांगी टीकाकार आचार्य अभय देव सूरीश्वर के पट्टधर शिश्य वल्लभ सूरी आपके गुरु थे। संवत 1132 में जन्में दादा गुरुदेव ने 9 वर्श की अल्प आयु में दीक्षा ग्रहण की । समस्त शास्त्रों में पारंगत बने, आपकी प्रतिभा, शास्त्र अभ्यासा, प्रवचन कला एवं सर्वोपरि वैराग्य व जिन शासन निश्ठा को देखते हुए आचार्य पद प्रदान कर श्री जिन वल्लभ सूरी जी का पट्टधर नियुक्त किया गया।
दादा गुरुदेव अपभं्रंश भाशा के महान कवि थे एवं चर्चरी प्रकरण, चैत्यवंदन कुलक आदि अनेक विशिश्ट ग्रंथों की रचना की। संवत् 1211 में आशाढ सुदी एकादशी को अजमेर में दादा गुरुदेव ने सांसारिक देह का त्याग किया। मणिधारी जिन चन्द्र सूरी को आपका पट््टधर मनोनीत किया गया। वर्तमान में देश के अनेक स्थानों पर आपकी दादा बाड़ियों में आपका यशोगाथा का गान किया जा रहा है। ’’ दासानुदासा इव सर्व देवा, यदीय पादाब्जले लुठंति। मरुस्थली-कल्पतरु-सजीयात, युग प्रधानो श्री जिनदत्त सूरिः दासानुदासा इव सर्व देवा, यदीय पादाब्जले लुठंति। मरुस्थली-कल्पतरु-सजीयात, युग प्रधानो श्री जिनदत्त सूरिः’’।  उन्होंने बताया कि जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ के गच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिन मणि प्रभ सूरीश्वरजी महाराज के सान्निध्य में 6से 8 मार्च 2026 को जैसलमेर में चादर महोत्सव होगा।  गणिवर्य का नियमित प्रवचन सुबह नौ से दस बजे तक ढढ्ढा कोटड़ी में होगा। चातुर्मासिक चतुर्दशी 9 जुलाई से चातुर्मास के व्रत नियम, जप,तप, साधना आराधना, चैत्य वंदन आदि के कार्यक्रम शुरू होंगे। मुनि मंथन प्रभ सागर व साध्वी शंखनिधिश्रीजी ने दादा गुरुदेव के आदर्शों का स्मरण दिलाया।

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Gordhan Soni

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