
✍️—मनोहर चावला वरिष्ठ पत्रकार
देश के हालात से अब आम आदमी पूरी तरह वाक़िफ़ है और परेशान भी , कि आख़िर इस देश का क्या होगा?ये राजनीतिक्ष देश को कहाँ से कहाँ ले जाएँगे? और इधर मैं अपने नगर की समस्याओं के निदान न होने से चिंतित हूँ और उन पर सालों से लिखता आ रहा हूँ। न लिखना रुका, न समस्या हल हुई। नगर की समस्याओं को बार बार लिखने से लोग मुझे बेवकूफ और मूर्ख भी कहने लगे है। लेकिन दिल है कि मानता नहीं ! लिखे बिना रहा जाता नहीं। वो बात अलग है कि जनभावनाओं को समझने की न तो नेताओ में दिलचस्पी है न ही सरकार- या प्रशासन को कोई इंट्रेस्ट है। बुयरोक्रेशी के मज़े है क्योंकि यहाँ की जनता काफ़ी धर्येवान और धीरज वाली है कोई दे तो उसका भला- न दे तो उसका भला! मतलब कोई काम करे तो ठीक , न करे तो ठीक! यह कि यहाँ की जनता अब सरकार की बजाय ईश्वर पर भरोसा करने लगी है कि वो जिस हाल में रखे, उसकी मर्जी? नेताओ को और अधिकारियों को सदबुद्धि मिले इसके लिए वो हमेशा भगवान से प्रार्थना करती रहती है। बाक़ी वो वक्त चला गया जब रेलवे फाटको को हटाने के लिए सालों- साल आंदोलन चला करते थे। बीकानेर के विकास और समस्याओं के निदान के लिए हमने पहले कई आंदोलन देखे, हड़ताले देखी, अनशन होते देखे, बाज़ारे बंद होती देखी। कालेज- स्कूल बंद होते देखे! अब किसी को बीकानेर के विकास में कोई दिलचस्पी नहीं रही। सड़के बुरी तरह टूटी पड़ी है। जगह जगह गड्डे दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे है। यातायात व्यवस्था लड़खड़ाई हुई है। सड़को के बीच में आवारा पशु गाय-गोधे राहगीरो को कुचल रहे है पागल कुत्तो के काटने से लोगो की मौत हो रही है। मिलावट का गढ़ बन गया है बीकानेर। दूध घी मिर्च मसाले कोई भी चीज शुद्ध नहीं है। सरकारी अस्तपताल और उनके डाक्टरों की मनमर्जी और न अव्यवस्था किसी से छिपी नहीं है। लेकिन यहाँ किसी से किसी को कोई सरोकार नहीं है। हम जैसे है वैसे ही रहेंगे। किसी प्रकार की कोई क्रांति की उम्मीद यहाँ न रखें। अब हम बात करते है अपने प्रदेश की। इन दिनों पूर्व मुख्य मंत्री अशोक गहलोत वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल के प्रति काफ़ी चिंतित नज़र आते है। उनके हितेषी बनते हुए उन्हें ताकीद करते है कि उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए कुछ मंत्री और एम एल ए षड़यंत्र रच रहे है और वासुदेवनानी को अगला मुख्यमंत्री बनाने की बाते भी वो मीडिया के सामने करते है। कभी कभी अगले मुख्यमंत्री के लिए वसुंधरा जी का नाम भी ले लेते है। इन दिनों केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत के संजीवनी प्रकरण में उनके माँ- बाप का नाम ले रहे है। न जाने अशोक गहलोत साहब को आजकल क्या हो गया है वो भी राहुल गाँधी की तरह हमेशा मोदी जी और उनकी नीतियों को कोसते रहते है। अखबारों की सुर्खियों में बने रहने के लिए मीडिया में ऊटपटांग बयान जारी करते रहते है। कभी वो संविधान संशोधन की बात करते है तो कभी राष्ट्रपति- राज्यपाल- और निर्वाचन आयोग पर दवाब में काम करने का आरोप लगाते है। वैसे आरोपों की बोछार करने में क्या डॉटसरा या फिर जूली क्या कम है ? खैर राजनीति में कोई किसी का नहीं होता? रही भजनलाल की बात फिलहाल आलाकमान की नज़रो में उनका क़द ऊँचा है उनका काम सर्वश्रेष्ठ है उनके हटने का गहलोत का फुआ मात्र है वो बीजेपी में मतभेद कराना चाहते है। लेकिन सचिन प्रकरण के बाद जनता उन्हें भली- भाँति जान गई है। अब रही देश की बात, देश में सुख- शांति है अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो चुका है। कुंभ का मैला शान्ति से निपट गया। पहलगांव में आंतिकी हमले का हमने पाकिस्तान को करारा जवाब दे दिया। ट्रम्प के बड़बोलेपन्न पर मोदीजी चुप रहे। लेकिन प्रार्कृतिक आपदाएं मोदी जी के हाथ में नहीं रही। जैसे अहमदाबाद से लन्दन जाने वाले हवाई जहाज़ का क्रेश होना, यात्रियों का मरना, अनावश्यक रूप से २५ से जायदा डाक्टरो का मरना, पूना में पुल का टूटना और पर्यटकों का नदी में डूबना, बद्रीनाथ- केदारनाथ मार्ग पर भू-स्खलन से यात्रियों की मौत, जगन्नाथ रथयात्रा में भगदड़ और मौते— लचाड़ व्यवस्था थी या लापरवाही या फिर प्राकृतिक आपदा ,यह तो जांच का विषय रहा। बाक़ी सब ख़ैरियत है बस अब बिहार के चुनाव पर भाजपा और कांग्रेस में दो दो हाथ होने है। बाक़ी जनता को तो अपनी रोटी, कपड़ा और मकान की चिता लगी है महंगाई और भ्रष्टाचार से आम आदमी दुखी है। मोदीजी विदेश यात्रा पर है। कर्मचारी आठवें वेतन आयोग को लागू करने के इंतज़ार में है। परेशान हुए व्यक्तियों की भारी भीड़ मन्दिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारे में देखी जा सकती है। शायद ऊपरवाला ही बेड़ा पार करे ? जय हो भारत भाग्य विधाता!













