बीकानेर, 9 सितम्बर। रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में मंगलवार को अकबर प्रतिबोधक, संस्कृत, प्राकृत, गुजराती व हिन्दी आदि भाषाओं में पुस्तकों के लेखक, बीकानेर में साधना करते हुए देव, गुरु व धर्म के प्रति श्रावक-श्राविकाओं में श्रद्धा बढ़ाने वाले चौथे दादा गुरुदेव जिन चंद्र सूरि की 412 वीं पुण्यतिथि उनके आदर्शों का स्मरण किया गया तथा गुरु इकतीसा का सामूहिक पाठ किया गया।
श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट व अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद की बीकानेर इकाई की ओर से आयोजित चातुर्मासिक प्रवचन में गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा. ने कहा कि जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ में चार दादा गुरुदेव वंदनीय व पूजनीय है। इनकी दादाबाड़ियां देश-विदेश में है, जहां अनेक श्रावक-श्राविकाएं नियमित दर्शन वंदन करते है तथा गुरु इकतीसा का पाठ करते है। दादा गुरुदेव गुरुदेव जिन चंद्र सूरि के बारे में एक दोहा भी प्रचलित है ’’ अकबर को अभक्ष्य छुड़ायों, अमावस्या को चांद उगायो’’। उन्होंने बताया कि जैन जगत के चतुर्थ दादा ने बीकानेर चातुर्मास किया तथा अनेक मंदिरों की प्रतिष्ठा करवाई। वे दादा गुरुदेव बीकानेर के बड़ा उपासरा के श्री पूज्य परम्परा, पाट प्रतिष्ठापक है।
खरतरगच्छ युवा परिषद की बीकानेर इकाई के अभिषेक डागा ने बताया कि प्रवचन स्थल पर अहमदाबाद के बाबू लाल डोसी व श्रीमती शकुंतला डोसी का अभिनंदन, कृष्ण लूणिया, गुलाब बोथरा तथा खरतरगच्छ महिला परिषद की बीकानेर इकाई अध्यक्ष मनीषा खजांची ने किया। सत्य साधना केन्द्र बीकानेर व कोलकाता में जैनाचार्य श्री पूज्य जिन चंद्र सूरि के सान्निध्य में उनका स्मरण किया गया।













