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आंधप्रदेश के राजमुंदरी के श्रावक-श्राविकाओं ने किया दर्शन-वंदन

जीवन में द्रव्य व भाव शुद्धि जरूरी-गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा.
बीकानेर, 10 सितम्बर। रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में बुधवार को चातुर्मासिक प्रवचन में गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर, मुनि मंथन प्रभ सागर, बालमुनि मीत प्रभ सागर तथा साध्वी श्री दीप शिखा व शंखनिधि श्रीजी म.सा के आंधप्रदेश के राजमुंदरी से आए करीब 25 श्रावक-श्राविकाओं ने समूह ने वंदना की। बीकानेर के जिनालयों के दर्शन किए तथा प्रवचन स्थल पर प्रभावना से श्रावक-श्राविकाओं का अभिनंदन किया।
श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट व अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद की बीकानेर इकाई की ओर से आयोजित चातुर्मासिक प्रवचन में गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा ने कहा कि जीवन में द्रव्य व भाव शुद्धि जरूरी है। द्रव्य शुद्धि के माध्यम से नाग-नागिन का जोड़ा देव धरणेन्द्र और देवी पद्मावती बने। त्रिर्यच के भव से देव भव प्राप्त हो गया।
गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा. ने बीकानेर के प्राचीन जिनालय भांडाशाह चिंतामणि जैन मंदिर व भगवान आदिनाथ मंदिर, चिंतामणि जिनालय की प्राचीन प्रतिमाओं, अभय जैन ग्रंथागार आदि का वर्णन करते हुए कहा कि प्राचीन जिनालयों के कारण बीकानेर को तीर्थ और पुण्य धरा कहा गया है।
प्रवचन स्थल पर राजमुदरी के मेघराज सिरेमल राठौड़, बाडमेर के रितिक बोरा का अभिनंदन निर्मल पारख, ओम प्रकाश कोठारी, खरतरगच्छ युवा परिषद की बीकानेर इकाई के अध्यक्ष अनिल सुराणा, सदस्य नरेन्द्र पुगलिया व नरेश भंडारी ने किया।

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Gordhan Soni

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