
नोखा यहाँ रोड़ा रोड़ पंचारिया टियूवेल के पिछ कन्हा महाराज पंचारिया
की खड़ी में बने जलाशय पर विगत वर्षो की भाती पितृपक्ष में 7 सितम्बर से 21 सितम्बा 15 दिन तक प्रतिदिन प्रातः 7-45 बजे से पित्र तर्पण का आयोजन हो रहा है । नोखा के विद्वान पंडित शास्त्री नरसी महाराज पाणेचा अपने सानिध्य में विधिविधान एवं मंत्रोच्चार से पितरों की पूजा अर्चना और तर्पण करवा रहे हैं। वैदिक मंत्रों की गूंज, हवन की सुगन्ध और घी की आहुति से वातावरण पूरी तरह धार्मिक और भक्ति मय हो रहा है। हिन्दु धर्म में श्राद्ध पक्ष जिसे पितृ पक्ष भी कहा जाता है, पितरों की आत्मा को शांति और मोक्ष के लिए यह पखवाडा अत्यन्त महत्व पूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस कालखंड में पितरों की आत्माये पृथ्वी पर अपने परिजनों के आशिर्वाद हेतु आती है। अतः विधिविधान से किया गया तर्पण, पिंडदान और हवन पितरों की तृप्ति का माध्यम बनता है। विद्वान पंडितों का मानना है कि पितृपक्ष में श्राद्ध और भक्ति भाव से किया गया श्राद्ध न केवल पितृ ऋण से मुक्ति दिलाता है बल्कि परिवार में सुख शांती और समृद्धि लाता है। यही कारण है कि सनातन परंमपरा में इस पखवाड़े को विशेष धार्मिक और अध्यात्मिक महत्व प्राप्त है। नरसी माहाराज ने कहा कि हर वर्ष की भांती अंतिम 15 वें दिन अमावश्या 21 सितम्बर रविवार का तर्पण तीर्थराज पुष्करजी में होगा। पितृपक्ष में आसकरण भट्टर, कन्हैयालाल करवा राजकुमार करनाणी, कन्हैयालाल मोदी, श्यामलाल झंवर, जगदीश प्रसाद जोशी, शंकर महाराज, नारायण मुंधड्डा, गोरधन पंचारिया सहित बड़ी तादाद में तर्पण कर रहे हैं।














