
नोखा l यहां श्री कृष्ण मंदिर प्रांगण में सत्संग समिति की ओर से श्राद्ध पक्ष में 15 से 21 सितंबर तक आयोजित सप्त दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन शनिवार को व्यास पीठ पर विराजित श्रीराम आश्रम वृंदावन के संत गोपीराम जी महाराज ने गोवर्धन गिरिराज कथा को आगे बढ़ाते हुए इंद्र प्रसंग, राम क्रीड़ा, कंस वध आदि प्रसंगों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि कन्हैया ने केवल गिरिराज जी की पूजा ही नहीं कराई बल्कि उन्होंने इंद्र के अभिमान को भी तोडा। महाराज ने कहा कि घर में प्रत्यक्ष देवता माता-पिता और पति है तो उनकी पूजा सेवा करनी चाहिए । महिलाओं की और देखते हुए महाराज जी ने कहा पति परमेश्वर है उनकी सेवा करनी चाहिए । 7 वर्षीय भगवान कृष्ण ने भगवान इंद्र के अहंकार को समाप्त करने के लिए गिरिराज पर्वत को धारण किया। महाराज ने कहा कि अभिमानी व्यक्ति को भगवान अपने पास नहीं आने देते । उन्होंने कहा कि अभिमान नहीं करना चाहिए छोटे व सरल बनकर रहना चाहिए। महाराज ने कहा मानव जीवन की सार्थकता प्रभु भक्ति में है। गोपी संवाद और मीराबाई के जीवन दर्शन से प्रभु भक्ति की शिक्षा ली जा सकती है। भक्ति करने वालों को भगवान मिलते हैं। महाराज ने कहा लोग मंदिर जाते हैं और परिक्रमा के दौरान भगवान की पीठ को प्रणाम करते हैं वह गलत है। उन्होंने कहा कि भगवान की पीठ में अधर्म का वास होता है और मुख के सामने धर्म का वास होता है। महाराज ने महारास प्रसंग पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि महारास की कथा वासना नहीं है बल्कि उपवासना है। भगवान को पाने के लिए तन को नहीं मंन को शुद्ध करना चाहिए। मन से दूसरों की सेवा करते हुए भगवान को मान लो तो उनकी भक्ति से कल्याण निश्चित है। संत गोपीराम महाराज ने अपनी ओजस्वी मधुर वाणी में भागवत महापुराण की इतनी अच्छी कथा सुनाई की दर्शक श्रोता भाव विभोर हो गए। छठे दिन की कथा में रतनलाल मोदी और इंदरचंद गट्टाणी दोनो से सपत्नीक मुख्य अजमान के रूप में कथा का श्रवण किया। रामकृष्ण खत्री, जगदीश प्रसाद खत्री, प्रहलाद मोहता ने बताया कि आज रविवार सातवें दिन कथा का विराम होगा और कल सोमवार 22 सितंबर से 30 सितंबर तक शारदीय नवरात्र में श्री रामचरितमानस के सामूहिक नवाहॣ पारायण पाठ का भव्य आयोजन होगा। यह आयोजन दो पारी मे सुबह 8:00 बजे व दूसरी पारी सायं 8:00 बजे से होगी। पत्रकार इंदरचंद मोदी ने सभी नोखा वासियो से इस महायज्ञ मे अधिक से अधिक भाग लेने की विनती की।














