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श्री मद्भागवत कथा सप्ताह का हुआ समापन, वेद–पुराणों का वर्णन और कृष्ण लीलाओं का हुआ दिव्य रसपान


गोकुल धाम भवन, कोठारी हॉस्पिटल के पीछे स्थित कथा पंडाल में चल रहे श्री मद्भागवत कथा सप्ताह का भव्य समापन श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में हुआ। पूरे सात दिनों तक चले इस आयोजन में श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित होकर भाग्यशाली बने। कथा व्यास, मारवाड़ माटी के गौरव, संत समाज के रत्न, परमहंस श्री 108 श्री डॉ. रामप्रसादजी महाराज ने अपने मधुर वचनों से वेदों और पुराणों की महत्ता, जीवन में धर्म का स्थान तथा श्रीकृष्ण की लीलाओं का रसपान कराते हुए श्रोताओं को अध्यात्म से जोड़ने का कार्य किया।

समापन अवसर पर आयोजित भव्य कथा में कृष्ण जन्म, माखन-चोरी, कालिया मर्दन, गोवर्धन-धारण, रासलीला और गीता उपदेश जैसे प्रसंगों का विशेष वर्णन हुआ। कथा व्यास श्री 108 श्री डॉ. रामप्रसादजी महाराज ने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला सिखाने वाली धारा है, जिसमें भक्तिभाव, ज्ञान और वैराग्य तीनों का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।

आयोजन समिति के अशोक सोनी (डांवर) ने बताया कि पूरे सप्ताह भर चली कथा के दौरान नगरवासियों ने विशेष उत्साह दिखाया। प्रत्येक दिन कथा स्थल को फूलों और रंग-बिरंगी सजावट से अलंकृत किया गया। कथा उपरांत आरती और भजन संकीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। कथा के दौरान वेदों और पुराणों में वर्णित मानव जीवन की महत्ता, सत्कर्म, दान, सेवा और धर्म की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।

विशेष रूप से पंचम दिन श्रीकृष्ण जन्म महोत्सव का आयोजन किया गया। आधी रात को नंदघर की झांकी सजाई गई और बालकृष्ण का झूला झुलाकर भक्तों ने उल्लासपूर्वक जन्मोत्सव मनाया। भक्तों ने ढोल–नगाड़ों की थाप पर नृत्य किया और “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” जैसे भजनों से वातावरण गूंज उठा। इस अवसर पर महिलाएँ और युवतियाँ पारंपरिक वेशभूषा में विशेष झांकियों में सम्मिलित हुईं।

मुख्य अतिथि के रूप में पधारे नगर विधायक श्री जेठाराम जी व्यास ने सनातन धर्म से जुड़े रहने का आह्वान करते हुए बालिकाओं के उत्थान पर जोर दिया। उन्होंने कृष्ण को जगतगुरू बताते हुए कहा कि उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना ही उचित जीवन जीना है।

कथा व्यास परमहंस श्री 108 श्री डॉ. रामप्रसादजी महाराज ने अपने मधुर वचनों मे श्रोताओं को गीता के उपदेशों का महत्व समझाते हुए कहा कि जीवन में संतुलन और समर्पण ही सच्ची सफलता का मार्ग है। उन्होंने बताया कि भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य का अंतःकरण पवित्र होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भ्रूण हत्या बंद करने का आह्वान करते हुए उन्होने कहा कि गोरक्षा हेतु भी पर्याप्त प्रयास करने चाहिए।

अशोक सोनी (डांवर) ने बताया कि समापन दिवस पर भी हवन, पूजन और प्रसाद वितरण का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सामूहिक आरती में भाग लेकर दिव्य अनुभूति प्राप्त की। महाराज श्री ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि कथा श्रवण का फल तभी मिलता है जब हम अपने आचरण और व्यवहार में भी धर्म, सत्य और भक्ति को उतारें।

आयोजक समिति की ओर से नन्दकिशोर जी सोनी, पवन सोनी, अभिषेक सोनी, ऋषभ सोनी, नथमल जी सोनी, जेपीजी सोनी और मधुरम सोनी (मांडण) ने सभी श्रद्धालुओं का धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में सद्भावना, प्रेम और एकता का संदेश देते हैं। कथा के समापन के बाद भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।

इस प्रकार श्री मद्भागवत कथा सप्ताह का समापन आध्यात्मिक उल्लास, भक्ति और सांस्कृतिक समृद्धि के साथ हुआ। नगरवासी इस अवसर को यादगार बनाकर अपने हृदय में श्रीकृष्ण की लीलाओं और वेद–पुराणों की शिक्षाओं को संजोकर ले गए।

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Gordhan Soni

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