गौ ग्राम सेवा संघ राजस्थान के राज्य वापी आह्वान पर जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री, गोपालन मंत्री, सचिव गोपालन, डायरेक्टर गोपालन को ज्ञापन प्रेषित किया गया।
इस ज्ञापन में राजस्थान की 2000 गौशालाओं के पिछले 11 माह से अटके अनुदान के लिए संघर्ष करने की चेतावनी दी, ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री को सूचना प्रेषित की गई यदि एक दो दिवस में अनुदान की राशि गौशालाओं के खाते में नहीं आती है तो, विवश होकर गौशालाओं को बड़े आंदोलन का रास्ता पकड़ना पड़ेगा, जिसका समस्त दायित्व राज्य सरकार का होगा।
संगठन के सूरजमालसिंह नीमराना ने बताया कि आज 11 माह बीत जाने के बाद भी राजस्थान की 2000 गौशालाओं को अनुदान नहीं मिला है, जबकि सरकार के पास में गौ संवर्धन निधि कोष से संचित राशि प्राप्त मात्रा में थी, परंतु राज्य सरकार ने उस राशि का उपयोग अन्यत्र कार्य में कर लिया, इसलिए गौशालाएं अनुदान से वंचित रह रही है।
हमारा नवंबर 2024 से 31 मार्च 2025 तक का 900 करोड़ का अनुदान अटका हुआ है, अभी तक 2000 गौशालाएं अनुदान से वंचित है, नीमराना ने बताया कि यदि राज्य सरकार आगामी दिनों में अनुदान का वितरण नहीं करती है तो, अधिकांश गौशालाएं गोवंश को छोड़ने पर विवश हो जाएगी और इसका पूर्ण दोष राज्य सरकार का होगा। वर्तमान में यदि समय पर अनुदान मिलता तो, गौशालाएं चारा खरीद सकती थी क्योंकि चारे के भाव सस्ते थे, पर इस अधर्मी सरकार ने गौशालाओं को प्रताड़ित करने के लिए उनके हिस्से के पैसों को अन्य कार्यों में प्रयोग में लिया है, जोकि गौशालाओं के हितों पर सरासर कुठाराघात है।
यदि हम बीकानेर जिले की बात करें, अभी तक 178 गौशालाओं में से मात्र 53 गौशालाओं को अनुदान मिला है, शेष 125 गौशालाओं के 40 करोड रुपए का, राज्य सरकार भुगतान नहीं कर रही है।
संघ के निरंजन सोनी ने कहा कि यदि राज्य सरकार आगामी दो-तीन दिन में अनुदान का भुगतान नहीं करती है तो, विवश होकर पूरे राजस्थान में गौशाला संचालक सामूहिक अनशन पर जाने की चेतावनी देते हैं। सरकार अपने विचारों में सुधार करें और भविष्य में गौ संवर्धन निधि के पैसे को खुर्द बुर्द नहीं करें, यह अंतिम चेतावनी है।
आज के इस ज्ञापन में सुनील व्यास, प्रेम कुमार गोदारा, प्रेम सिंह घूमान्दा, चंदवीर सिंह, बलदेव दास भदानी, ओम पुरोहित, त्रिलोक मारू, गोपी किशन अग्रवाल, अनूप गहलोत, उमाशंकर सोलंकी आदि ने भाग लिया।














