

आठवा दिन
हनुमान रावण संवाद, और हनुमाम जी द्वारा लंका दहन, रामजी को सीता का संदेश
बीकानेर। श्री नवदुर्गा रामलीला कमेटी मोहता चौक जोशी बगेची उस्ता बारी के बाहर मंचित रामलीला के आठवें दिन
कमेटी के गिरधर जोशी ने बताया कि सातवी रात्रि की रामलीला में रात्रि 10.30 बजे बीकानेर पश्चिम के विधायक हिन्दू जागरण मंच के जेठानन्द जी व्यास और भाजपा के नयाशहर मंडल के अध्यक्ष विशाल जी गोलछा ने शिरकत की । जिससे कुछ संवाद दृश्यों को मंचित नही किया जा सका उन्हें आज आठवी रात्रि को मंचित किया जायेगा। विधायक जेठानन्द जी का कमेटी के सदस्यों द्वारा दुपटा ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह देकर स्वागत अभिनंदन किया गया। विधायक जी ने सभा को सम्बोधित करते हुवे कहा कि धर्म, सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर चले भगवान श्रीराम को आदर्श मानकर हम सभी को धर्म सत्य और कर्तव्य के मार्गपर चलना चाहिए ऐसे भक्त की हमेशा जीत होती है। साथ ही साथ गौ रक्षा का संकल्प दिलाया। विशाल गोलछा ने कहा कि हमारा परिवार ओसवाल है किंतु हमारे पूरे परिवार ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात किया हुआ है। उन्होंने प्रतिदिन सत्संग कीर्तन और राम नाम के उच्चारण की महिमा के किस्से सुनाए। कमेटी के कैलाश जोशी ने अपने उद्बोधन में विधायक जेठानन्द जी और भाजपा नेता विशाल गोलछा का आभार व्यक्त किया।
आज आठवी रात्रि को हनुमान रावण संवाद, और हनुमाम जी द्वारा लंका दहन,राम जी को सीता का सन्देश आदि रोमांचित कर देने वाले दर्शय मंचित किये गये। जिसमें राम मोहित गज्जानी , हनुमान वासु जोशी , लक्ष्मण योगेश भादाणी, रावण संजय जोशी सन्नू महाराज, मेघनाथ कृष्णा जोशी बाली सौरभ शर्मा, सुग्रीव किशन अग्रवाल, विभीषण चन्द्र शेखर , दुर्मुक मोहित कलवानी अक्षय कुमार मयंक पुरोहित , सीता यशराज व्यास तारा वासु जोशी और अन्य पात्रों में विजय भादाणी कृष्ना जोशी ने भूमिका निभाई।
रावण हनुमान संवाद
लंका में रावण और हनुमान के बीच का संवाद, जिसमें हनुमान रावण को प्रभु श्री राम का संदेश देते हैं और सीता को छोड़ने का आग्रह करते हैं, लेकिन रावण अपने अहंकार में डूबा रहता है और हनुमान को मृत्युदंड देने की आज्ञा देता है,रावण और हनुमान द्वारा चौपाई बोली जाती है
“मृत्यु निकट आई खल तोही। लागेसि अधम सिखावन मोही॥”
“उलटा होइहि कह हनुमाना। मतिभ्रम तोर प्रगट मैं जाना॥”
“सुनि कपि बचन बहुत खिसिआना। बेगि न हरहु मूढ़ कर प्राना॥”
लंका कांड
अशोक वाटिका में सीता से मिलने और रावण की सभा में संदेश पहुंचाने के बाद, हनुमान जी लंका से लौट रहे थे।
रावण का आदेश पर रावण के सैनिकों ने उन्हें पकड़ लिया और अदालत में पेश किया, जहां रावण ने उनकी पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया।
अपनी शक्ति से सभी बाधाओं को तोड़ते हुए, हनुमान जी अपनी पूंछ पर लगी आग के साथ पूरे लंका शहर में घूमते हैं विभीषण के घर को छोड़ कर पूरी लंका को जला देते हैं। चौपाई बोली जाती है
“जारा नगरु निमिष एक माहीं। एक बिभीषन कर गृह नाही॥”
हनुमान जी ने रावण के अहंकार और उसकी लंका को सबक सिखाने के लिए ऐसा किया, जिससे रावण को यह संदेश मिल सके कि वह प्रभु श्रीराम और सीताजी को लौटा दे। फिर हनुमान जी
आग बुझाने के लिए समुद्र में गए। भगवान राम को सीता का संदेश के संवाद आदि मंचित किये गये।
आज मंच निर्देशन बीमू बिस्सा, इंद्र कुमार पुरोहित मोहित जोशी ने किया । मंच संचालन नरेश जोशी गोपाल जोशी ने किया। चन्द्रिका शर्मा ने नृत्य प्रस्तुत किया नगाड़ा पर अजय ओझा ने संगत की।














