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श्रीमद् भागवत महापुराण साक्षात भगवान का स्वरूप है – पंडित महर्षि


नोखा । यहाँ तहसील परिसर स्थित श्री अरकेश्वर महादेव मंदिर में 11 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक मंदिर व्यवस्थापक लालचन्द उपाध्याय के सानिध्य एव -उनकी देख रेख में दोपहर 12:15 बजे से आयोजित हो रही संगीतमयी सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के तीसरे दिन सोमवार को व्यास पीठ पर विराजित विद्वान पंडित ओमप्रकाश महर्षि ने अपनी ओजस्वी मधुर वाणी में ध्रुवाख्यान, भरत चरित्र, नृसिंग अवतार भक्त प्रहलाद, गजेन्द्र मोक्ष और समुन्द्र मंथन प्रसंगों की कथा सुनाते हुए नर-नारी श्रोताओं को ज्ञान गंगा में डुबकिया लगवाते हुए भाव विभोर कर दिया। महाराज ने कथा प्रसंगों के साथ-साथ अनेको ज्ञान वर्धक जानकारिया देते हुए श्रोताओं को सोचने व ग्रहण करते अपने जीवन में उतारने पर बाध्य कर दिया। कथा व्यास ओमप्रकाश महर्षि ने श्रोताओं से कहा कि उठते बैठते हर समय भगवान को याद करो उन्होंने सबरी का उदारहण देते हुए कहा कि भगवान अपने भक्त के पास दौड़े दोड़े आते है, भगवान का भजन करने वालों का कल्याण हो जाता है, वो सिधे बैकुंठ में जाते है। उन्होंने कहा कि सर्वोतम ग्रंथ श्रीमद भागवत साक्षात भगवान का स्वरूप है। कथा व्यास ने कहा कि खड़े होकर मल मूत्र त्याग, करना, जल में मलमुत्र त्याग करना, भ्रुण हत्या करना, पर स्त्रिी गमन करना आदि को बहुत महा पाप बताया और रजस्वला स्त्रिीगों के बारे मेंभी अनेको जानकारियां देते हुए कहा कि उन्हें तीन दिन तक कोई भी काम नही करना चाहिए। कथा प्रसंगानुसार पंडित प्रेम शास्त्री ने भजनों – “कौन कहते है भगवान आते नही” और “हरीभजले- हरीभजले हरी भजले का मौका है” आदि की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगीतकार तबला वादक मोटू ने अपनी अंगुलियों का कमाल करते हुए कथा में चार चाँद लगाये। कथा के दौरान छगनलाल राठी सपत्निक प्रिया राठी मुख्य यजमान के रूप में कथा का पान किया। आरती के बाद प्रसाद वितरण व्यवस्था सम्भाल रहे उमेश राठी ने वितरण किया।

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Gordhan Soni

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