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कमल रंगा पर्याय है राजस्थानी भाषा मान्यता आन्दोलन के प्रबल योद्धा।
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जो चार दशक से सभी जन का राजस्थानी भाषा से मन-अन्तर्मन संजोता।।
रंगा जी जन्मोत्सव मनाया..  सभी ने जी भर के उत्साह में।
लक्ष्मी नारायण सोनी कमल रंगा का सम्मान.. राष्ट्रीय कवि चौपाल में..।।

“साच में नूंवों बरस, नूंवी रंगत दे वैसा अपणायत रा रंग भरैला”

राष्ट्रीय कवि चौपाल की 549 वीं कड़ी *नव वर्ष में समाहित संकल्प- हर्ष* को समर्पित रही आज के कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ हरिदास हर्ष मुख्य अतिथि लीलाधर सोनी विशिष्ट अतिथि में कमल रंगा व सरदार अली परिहार आदि मंच सुशोभित हूए कार्यक्रम शुभारम्भ करते हुए रामेश्वर साधक ने अपने बौद्धिक में कहा कि नव हमारा चैत्र मास में आता है लेकिन लोकिक व अन्तर्राष्ट्रीय मान्यता में मनाएंगे क्योंकि नव वर्ष में समाहित संकल्प व हर्ष कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ हरिदास हर्ष साहित्य सदन को नव वर्ष की बधाई देते हुए काव्य धारा में “द्विभ्रमित सा मैं विस्मृति के स्तूप को, मानसिक सतल में प्रतिष्ठित करते हुए, बह रहा हूं भ्रांतियों में चौराहे की और ” अपनी बात रखी मुख्य अतिथि समाजसेवी आध्यात्म हृदय लीलाधर सोनी (महामंत्री स्वर्णकार समाज) ने  भटकती क्यों फिरें मां गाय। आज दुखी भारत वर्ष में करता न कोई सहाय। विशिष्ट अतिथि राजस्थानी भाषा मान्यता – मूर्त रूप देखने के आतूर जांबाज सिपाही कमल रंगा नव वर्ष मंगलमय संदर्भ राजस्थानी भाषा में “साच में नूंवों बरस, नूंवी रंगत दे वैसा अपणायत रा रंग भरैला” विशिष्ट अतिथि सरदार अली परिहार : तूं जो दुखी, तूं खुद कारण, क्यों तूं खून जलाता है। इससे पूर्व के के व्यास व्यास ने पय पश्यन्ती पर बिखरी विद्या,वाणी की देवी नमोस्तुते। सरस्वती वंदना की
          डॉ कृष्ण लाल विश्नोई : रही न गुलजार की बातें, अब गुलजार न रही ..  आध्यात्म दार्शनिक लेखक प्रमोद शर्मा ने ये क्या मैं देख रहा हूं पगला …  शिव दाधीच बीकानेरी : जहां बसंत अंगड़ाई लेता है, दिनकर भी भी अठखेलियां करता है … के के व्यास : घुट रहे भाव अन्तर्मन में वाणी की सीढ़ी न चढ़ पाए। शाइर कवि कासिम बीकानेरी : सदी इक्कीसवीं मैं क्यूं हर इन्सान भरे घर में अकेला हो गया है…  
      रामेश्वर साधक :  रे जीव..!  हे जीव..!! तू फिर से खुशियां क्यों उधार लेता है…  राजकुमार ग्रोवर : गगन मे जिसके लहराता है ऊँचे से ऊँचा सदा तिरंगा, देश मेरा वो भारत है, सब देशो में सबसे चंगा…विशाल भारद्वाज : बाहर बर्फ गिरे या कोहरे का पहरा है, पर भीतर जज्बातों की आग जलाने दिलाने आ रहे हैं…  मधुरिमा सिंह : विगत से सीख उसकी पुनरावृत्ति न कर, धूमधाम से नव वर्ष का स्वागत कर..  कृष्णा वर्मा : स्वागत है नववर्ष का, नववर्ष पर संकल्प करें देश को नई दिशा दिखाएगे..  सुभाष विश्नोई : दिसंबर पर जनवरी भारी पड़ रही है, वर्ष 25 जीने से उतर आया है.. 
       पवन चड्ढ़ा : वक्त करता जो वफ़ा आप हमारे होते … कैलाश चारण देशनोक : सुमिरन करले ओ मेरे मना, बीते उमर हरि नाम बिना
     आज के विशेष कार्यक्रम में राष्ट्रीय कवि चौपाल में राजस्थानी भाषा के कायल हृदय श्री कमल जी रंगा का
जन्मोत्स्व मनाया गया तथा समाज सेवी कवि गीतकार लीलाधर सोनी के स्वर्णकार समाज के महामंत्री चयन होने पर उपरोक्त दोनों का शाॅल श्री फल माल्यार्पण द्वारा आत्मीय अभिनंदन किया गया तथा इनके शतायु अधिक ईश कामना की गई
    आज़ के कार्यक्रम में विधिवेत्ता कवि गंगा विशन विश्नोई, घनश्याम सौलंकी, महेश कुमार हर्ष, छोटू खां, परमेश्वर सोनी, सोनिया भगोरिया, साकिर, भवानी सिंह, नत्थू, आदि कई गणमान्य साहित्यानुरागी उपस्थित रहे कार्यक्रम संचालन चुटिले अंदाज में शिव दाधीच बीकानेरी ने किया जबकि आभार साधक ने किया
   जय साहित्य जय साहित्यकार

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Gordhan Soni

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