प्रेस रिलीज
*रमक-झमक में महिलाओं ने गाए गणगौर के पारम्परिक गीत*
*गणगौर संस्कृति अलंकरण सम्मान दिया*
*परम्परा और संस्कृति को जीवंत रखने के रमक झमक प्रयास प्रशंसनीय*
रमक झमक परिसर में दो दिवसीय ‘म्हारी गणगौर’ उत्सव के प्रथम दिन गणगौर के पारंपरिक गीत गूंजे। बालिकाओं एवं महिलाओं ने एकल एवं सामूहिक रूप से गणगौर के पारंपरिक गीतों की प्रस्तुतियां देते हुए नृत्य किया। गणगौर से संबंधित विभिन्न सेवाएं देने वाली अग्रणी महिलाओं को गणगौर संस्कृति अलंकरण सम्मान प्रदान किया गया।
उत्सव मे प्रथम दिन ‘गवरजा होले हौले चलो ओ, थोरी पायलिया करे झणकार’, ‘झड़ा फड़ी रंग महल में रे राज छोड़ गवरल ईसर तो दुप्पटो, कठे सूं आई सूंठ कठे सूं आयो जीरो’ एवं म्हारी चांद गवरजा भलो ए नादान गवरजा रत्नो रा खंभा दिखे दूर सूं’ सरीखे गीत गाए, जिससे वातावरण में उल्लास और उमंग फैल गया और तालियां गूंजने लगी। महिलाओं ने सिर पर गवर की प्रतिमा विराजमान कर ‘खेलण दो गणगौर, गढ़ा रे मारु एवं बालिकाओं ने ‘आगे आगे बैंड बाजा पीछे मोटर कार है’ गीत पर नृत्य किया। कार्यक्रम की संयोजक ज्योति स्वामी ने बताया कि समस्त मंडलियों ने और सम्मानित होने वाली महिलाओं ने सामूहिक रूप से गवरजा से अरदास के रूप में ‘गढ़न कोटन सूं उतरी सरे, हाथ कमल के रो फूल’ गीत गाया तो सभी भाव विभोर हो गए।
जोधपुर से विशेष रूप से शामिल हुई गणगौर की वरिष्ठ कलाकार समाज सेवी रंजना बिस्सा ने जोधपुर की झलकियां बताई।
*इन्होंने दी पारंपरिक गीतों प्रस्तुतियां*
रेखा सोनी, इंदू, लक्ष्मी उर्मिला, सन्तोष सोनी, शालिनी व्यास, सिमरन व्यास, मधु देवी, पवनी देवी, नंदनी व्यास, अरुणा सोनी, अंकिता, निधि पूजा, शीतल, चंद्रकला सोनी, रेखा सोनी, इंदू, उर्मिला, पिंकू, संतोष सोनी, गायत्री देरासरी, रामप्यारी चूरा, बबीता शर्मा, शिवानी शर्मा, विजय लक्ष्मी पुरोहित, उमा जोशी, कृष्णा जोशी, रेणु पुरोहित, सीमा चूरा, लक्ष्मी भादानी, भवरी देवी एवं प्रीति ओझा ने दी गीतों की प्रस्तुतियाँ दी । वहीं दीपिका छंगाणी एवं गुनगुन शर्मा ने गीतों पर नृत्य प्रस्तुत किया।
*शयह रहे अतिथि
समारोह में अतिथि के रूप में केनरा बैंक की अधिकारी आकांक्षा शर्मा, एसबीआई की मैनेजर कोमल माली, जोधपुर गणगौर की रंजना बिस्सा मौजूद रहे। स्वागताध्यक्ष राजकुमारी व्यास एव अध्यक्षता राम कंवरी ओझा ने की। अतिथियों का स्वागत बबीता शर्मा ने किया।
इनको दिया गणगौर संस्कृति अलंकरण
गणगौर रंगोली के लिए चंद्र कला सोनी, बेहतरीन गणगौर स्वरूप के लिए कामाक्षी आचार्य, घूमर के लिए अरुणा सोनी, धींगा गवर पेंटिंग के लिए आशा व्यास, गणगौर वस्त्र के लिए निशा पुरोहित एवं खुशाल देवी व्यास, वस्त्र डिजाइन व साफा के लिए मधु चौहान एवं निधि तंवर, कुएं से पानी निकाल कर समस्त गणगौर को पानी पिलाने की रस्म के लिए पूर्णिमा व्यास, गणगौर वीडियो एलबम के लिए निवेदिता व्यास, अक्षिता जोशी, गणगौर स्वांग के लिए रंजना बिस्सा और गुनगुन शर्मा को गणगौर संस्कृति अलंकरण सम्मान पत्र, स्मृति चिन्ह और रमक झमक ओपरना भेंटकर अभिनंदन किया गया।
परम्परा संस्कृति के संरक्षण के लिए ऐसे आयोजन
रमक-झमक प्रमुख और विख्यात संस्कृतिकर्मी प्रहलाद ओझा ‘भैरूं’ ने बताया कि आजकल फिल्म, सीरियल और आधुनिक गीत चल रहे हैं। वहीं टीवी और खासकर मोबाइल में सब व्यस्त रहते हैं। भागमभाग भरे जीवन के इस दौर में महिलाएं घर के समस्त कार्यों की जिम्मेदारी निभाती हैं, वर्तमान युग में जॉब भी करती हैं। ऐसे व्यस्तता और जीवन की आपाधापी में गणगौर की प्राचीन परम्परा संस्कृति कहीं कम न हो जाए, इसलिए प्रोत्साहन और प्रेरणा के उद्देश्य से रमक-झमक ने यह आयोजन शुरू किया। ओझा ने बताया कि महिलाओं का प्रमुख त्यौहार है गणगौर! पुरुष मंडलियों ने गणगौर गीत गाकर इसका महत्व बढ़ाया है, लेकिन ऐसे ही गणगौर गीत गाने वाली महिला मंडलियां भी बड़ी संख्या बनें और जो बनी हुई है उनको प्रोत्साहन एवं सम्मान मिले।
ओझा ने बताया कि शहर की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखने तथा उसका व्यापक प्रचार करना ही रमक-झमक का मुख्य उद्देश्य है और इसकी प्रेरणा पिता छोटूजी ओझा से मिली।













