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उग्र विहारी मुनिश्री कमल कुमार का लाड़नू की ओर विहार गंगाशहर में एक वर्ष के प्रवास से जगी धार्मिक चेतना की अलख
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उग्र विहारी मुनिश्री कमल कुमार का लाड़नू की ओर विहार गंगाशहर में एक वर्ष के प्रवास से जगी धार्मिक चेतना की अलख

बीकानेर। बीकानेर के गंगाशहर क्षेत्र में धर्म, अध्यात्म और तपस्या की गंगा बहाने के पश्चात, उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनिश्री कमल कुमार जी स्वामी का ‘गुरू दर्शन’ हेतु लाड़नू की ओर विहार निश्चित हो गया है। इस अवसर पर आयोजित त्रि दिवसीय ‘मंगलभावना समारोह’ के दूसरे दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। समाज के विभिन्न संगठनों और गणमान्य जनों ने मुनिश्री के प्रवास काल के दौरान हुए ऐतिहासिक कार्यों को याद करते हुए उन्हें भावभीनी विदाई दी।

संयम और साधना का जीवंत संदेश
तेरापंथ न्यास के ट्रस्टी जैन लूणकरण छाजेड़ ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि मुनिश्री का सान्निध्य त्याग और आत्मसंयम का अमूल्य संदेश प्रदान करता है। उन्होंने कहा, “मुनिश्री ने सिखाया कि साधना केवल वाणी तक सीमित नहीं, बल्कि उसे आचरण में उतारना चाहिए। अल्प समय में आपने हमारे हृदयों में जो संस्कार रोपे हैं, वे सदैव हमारा मार्गदर्शन करेंगे।”
उन्होंने कहा कि गंगाशहर में एक वर्ष के प्रवास के दौरान मुनिश्री ने जिस प्रकार धर्म की अलख जगाई और लौकिक व लोकोत्तर धर्म की सरल, सारगर्भित व्याख्या जन-जन तक पहुंचाई, उससे समाज का जीवन आत्मकल्याण की दिशा में अग्रसर होगा।

शिक्षा और अध्यात्म का अनूठा संगम
आचार्य श्री तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष गणेश बोथरा ने मुनिश्री के प्रवास को बीकानेर क्षेत्र के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि मुनिश्री के सान्निध्य में ही आचार्य श्री महाश्रमण अंतरराष्ट्रीय स्कूल का शिलान्यास हुआ, जो क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।

प्रवास काल की ऐतिहासिक उपलब्धियां
सभा मंत्री जतन लाल संचेती ने वर्ष भर चले कार्यक्रमों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए मुनिश्री के प्रभाव को रेखांकित किया और कहा कि मुनिश्री की प्रेरणा से न केवल धार्मिक माहौल बना, बल्कि सामाजिक समरसता हेतु ‘डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती’ जैसे महत्वपूर्ण आयोजन भी संपन्न हुए। घर घर में प्रवचनों की श्रृंखला की शुरुआत हुई जिससे हजारों लोगों को घर बैठे धर्म ओर अध्यात्म से जुड़ने का मौका मिला। साथ ही, भिक्षु भजन संध्या, भक्तामर पाठ और प्रतिक्रमण का क्रम घर-घर शुरू हुआ।
तपस्या का कीर्तिमान
मुनिश्री की प्रेरणा से 48 लोगों ने वर्षीतप, 12 जनों ने मासखमण और 115 से अधिक श्रावकों ने 8 या अधिक दिवस की तपस्या की।
संस्कार और सेवा
‘जैन संस्कार विधि’ का व्यापक प्रचार हुआ और 13 कार्यकर्ताओं ने ‘उपासक’ बनने हेतु नाम लिखवाए।
सामायिक संकल्प
गंगाशहर में हजारों श्रद्धालुओं ने नियमित सामायिक साधना का संकल्प लिया, जो पहली बार इतनी व्यापक स्तर पर देखा गया।

विदाई समारोह में उमड़ा जनसमूह
कार्यक्रम का कुशल संचालन संगठन मंत्री कमल भंसाली ने किया। इस भावुक क्षण पर अमर चंद सोनी, पवन छाजेड़, करणी दान रांका, मांगीलाल बोथरा, अजित संचेती, श्रीमती प्रेम बोथरा , सुनीता पुगलिया , देवेंद्र डागा,धर्मेन्द्र सामसुखा विपिन बोथरा, रोहित बैद, मनोज छाजेड़, मंयक सिंगी आदि सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने मुनिश्री के मंगल विहार की कामना की। सभी ने एक स्वर में कहा कि भौतिक दूरी भले ही बढ़े, लेकिन मुनिश्री की प्रेरणा सदैव समाज के साथ रहेगी।

सूरजमल छाजेड़ का अभिनन्दन
तपस्वी सूरजमल छाजेड़ के 200 एकासन लगातार करने व जारी रखने पर तथा पान पराग व जर्दा का हमेशा के लिए त्याग करने पर श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गंगाशहर के अध्यक्ष नवरतन बोथरा , उपाध्यक्ष पवन छाजेड़ व कमल चन्द भंसाली ने अभिनन्दन किया व पताका पहनाकर व साहित्य भेंट किया।

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Prakash Samsukha

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