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अस्सी संगीत साजों के साजिन्दें, सप्तम स्वर के गायक संगीत सम्राट मगन कोचर का निधन
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अस्सी संगीत साजों के साजिन्दें, सप्तम स्वर के गायक
संगीत सम्राट मगन कोचर का निधन
बीकानेर, 30 जनवरी। अस्सी संगीत साजों के साजिन्दे, सप्तम स्वर के गायक, संगीत सम्राट की उपाधि से अलकृंत 74 वर्षीय मगन कोचर का शुक्रवार को निधन हो गया। वे अपने पीछे भरापुरा परिवार तथा अनेक संगीत शिष्यों को बिलखता छोड़ गए है। उनके पार्थिव देह की अंत्येष्टि शुक्रवार को ही गोगागेट के बाहर जैन समाज के श्मशानगृह में की गई। उनकी अंत्येष्टि में बड़ी संख्या में जैन, अजैन, संगीत से जुड़े कलाकारों ने अंतिम श्रद्धांजलि दी।
कोचर फ्रेण्डस क्लब के जितेन्द्र कोचर तथा पूर्व मनोनीत पार्षद सुरेन्द्र कोचर ने बताया कि मगनजी अपनी शास्त्रीय संगीत में गीतों की प्रस्तुति में श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर देते थे। उन्होंने अपनी अंतिम प्रस्तुति जैन श्वेताम्बर तपागच्छ के गच्छाधिपति, पदमश्री से सम्मानित आचार्यश्री विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी गंगाशहर रोड़ की पार्श्वनाथ बगीची के भगवान आदिनाथ भवन परिसर 14 जनवरी 2026 को दी। तब उन्होंने कहा कि देव, गुरु व धर्म की कृपा से बीमारी के कारण मौत के मुंह से निकला हूं। गच्छाधिपति आचार्यश्री विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी के सामने गाकर उनका आशीर्वाद ले लिया है। अब कब स्वरों से गुरुदेवों की वंदना का मौका मिलेगा ईश्वर ही जाने। गच्छाधिपति सहित मुनि, साध्वीवृंद तथा हजारों श्रावक-श्राविकाओं ने उन्हें श्रेष्ठ भक्ति भरी गायकी से प्रभावित होकर आशीर्वाद दिया था।
कोचर ने बताया कि जीवन पर्यन्त स्वर्गीय मगन कोचर संगीत साधना में ही समर्पित रहे। उनके पास बड़ी संख्या में प्राचीन व दुर्लभ संगीत साजों का संग्रह है। उनमें से वे 80 तरह के साजों को बजाना जानते थे । हिंदुस्तान में अकेले ही मगनजी कोचर थे जो वर्तमान में 80 तरह के साजों को बजा सकते थे। उन्होंने प्रभु व गुरु भक्ति के गीतों के साथ सभी जाति बिरादरी विशेषकर बाबा रामदेव जी आदि देवताओ के तथा सर्व धर्म भजन लिखे तथा उनके आमंत्रण पर जात पांत का भेद भूलकर उनके कार्यक्रमों में स्व रचित गीतों की प्रस्तुति देकर सराहना बटोरते थे। उन्होंने हजारों शिष्यों को संगीत की शिक्षा दी, जो वर्तमान में देश के विभिन्न कोनों में रहकर संगीत साधना कर रहे थे। उनका फिल्म जगत के गायकों व साजिन्दों से भी अच्छा संपर्क था। वे उनसे मिलने बीकानेर आते रहते थे। उन्होंने संगीत की शिक्षा व प्रस्तुति पर कभी किसी से कोई पारिश्रमिक नहीं लिया। वे कहते थे कि परमात्मा, गुरुजनों भाइयों की मेहबानी से स्वर साधना कर रहे है। उनका भव्य नागरिक अभिनंदन जैन श्वेताम्बर तपागच्छ के आचार्य श्री धर्म धुरंधर जी महाराज के सानिध्य में कोचरों के चौक में वर्ष 2010 में हुआ था।
सहज स्वभाव के थे मगनजी कोचर
सहज, विनम्र व सरल स्वभाव के थे मगनजी कोचर, अपने से बड़े या गुणीजन के मिलने पर वे पैर छूकर आशीर्वाद लेते थे। संगीत सम्राट मगनजी कोचर के निधन से न केवल बीकानेर बल्कि सम्पूर्ण सांस्कृतिक जगत ने एक युगदृष्टा कालाकार को दिया। उनका जीवन, व्यक्तित्व एवं कृतित्व, उनकी संगीत, गुरु व प्रभु भक्ति पीढ़ियों तक सदैव प्रेरणादायक रहेगी। वे विराट व्यक्तित्व के धनी थे, उन्होंने आजीवन निष्काम भाव संगीत साधना की तथा निर्लिप्त, सादगीपूर्ण जीवन को अपना आदर्शन बनाए रखा। उन्होंने गीत संगीत के क्षेत्र के अनेक आयाम स्थापित किए। उनकी भावभरी गायकी श्रोताओं के हृदय को छू लेती थी। कार्तिक पूर्णिमा को निकलने वाली सवारी के दौरान कोचर मंडल में उनकी प्रस्तुति को सुनने के लिए हजूम उमड़ पड़ता था।

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Prakash Samsukha

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