



बीकानेर।
आरएनबी ग्लोबल विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के सौजन्य से आयोजित सात दिवसीय विशेष एनएसएस शिविर के षष्ठम दिवस का आयोजन ग्रामीण शिक्षा, विधिक जागरूकता एवं सेवा गतिविधियों को समर्पित रहा। इस अवसर पर गोद लिए गए ग्रामों के राजकीय विद्यालयों में विविध शैक्षणिक एवं सामाजिक कार्यक्रम संपन्न हुए।
दिन के प्रथम सत्र में एनएसएस स्वयंसेवकों द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, हुसंगसर में विद्यार्थियों के लिए डिजिटल साक्षरता, विधिक जागरूकता, महिला एवं बाल अधिकार विषयों पर व्याख्यान आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बेसिक एवं एप्लाइड साइंस संकाय की सहायक आचार्य सुश्री ज़ैबा ख़ान स्वयंसेवकों के साथ उपस्थित रहीं। स्वयंसेवकों ने विद्यार्थियों को मोबाइल फोन के सुरक्षित एवं सकारात्मक उपयोग, साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव तथा कानून की मूलभूत जानकारी दी। साथ ही महिला एवं बाल अधिकारों, सुरक्षा हेल्पलाइन तथा सामाजिक संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी जागरूक किया गया।
इसके पश्चात एनएसएस स्वयंसेवकों द्वारा विद्यालय परिसर में स्वच्छता एवं आधारभूत संरचना के रखरखाव का कार्य किया गया। कक्षा-कक्षों, प्रांगण एवं सार्वजनिक स्थलों की सफाई कर स्वच्छ एवं सुरक्षित विद्यालय वातावरण का संदेश दिया गया। साथ ही विद्यार्थियों के साथ शिक्षण एवं अनुभवात्मक अधिगम गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें संवाद, समूह कार्य एवं व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से सीखने को प्रोत्साहित किया गया।
द्वितीय सत्र में एनएसएस स्वयंसेवकों द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, नगासर में भी उपरोक्त सभी गतिविधियाँ दोहराई गईं। यहाँ भी डिजिटल साक्षरता, विधिक जागरूकता, महिला एवं बाल अधिकारों पर जानकारी दी गई, विद्यालय परिसर की सफाई की गई तथा विद्यार्थियों के साथ शिक्षण एवं अनुभवात्मक गतिविधियाँ संचालित की गईं। स्वयंसेवकों और विद्यार्थियों के बीच सक्रिय सहभागिता एवं उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम की प्रस्तावना एवं समुचित प्रबंधन डॉ. आर. के. सोनी द्वारा किया गया। संपूर्ण गतिविधियों का मार्गदर्शन एवं समन्वय एनएसएस समन्वयक डॉ. बी. एस. राठौड़ द्वारा किया गया, जिन्होंने सेवा भावना एवं सामाजिक दायित्व के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
इन गतिविधियों के माध्यम से एनएसएस स्वयंसेवकों ने ग्रामीण विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षा, स्वच्छता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ किया। षष्ठम दिवस की गतिविधियाँ ग्रामीण समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुईं।




























