



बीकानेर, 4 फरवरी। खरतरगच्छाधिपति, आचार्यश्री श्री जिनमणिप्रभ सूरिश्वरजी महाराज, गणिवर्य मयंक प्रभा सागर, मेहुल प्रभ सागर, मुनि मंथन प्रभ सागर, मीत प्रभ सागर, साध्वी दीपमाला व शंखनिधि जैन श्वेताम्बर पार्श्वचन्द्र गच्छ की साध्वी पद्म प्रभा व सुव्रताश्रीजी के सान्निध्य में गंगाशहर के गोल मंदिर में बुधवार को पांच दिवसीय अंजन शलाका प्रतिष्ठा महोत्सव शुरू हुआ।
जीर्णेद्धारोपरान्त नवनिर्मित त्रिशिखरीय शिखरबद्ध जिनालय में श्री सांवलिया पार्श्वनाथ भगवान सहित 15 नूतन व प्राचीन प्रतिमाओं की अंजन शलाका-प्रतिष्ठा के लिए मंदिर में स्थापित किया गया। अंजन शलाका-प्रतिष्ठा महोत्सव भगवान श्री पार्श्वनाथ मंदिर जीर्णोंद्धार ट्रस्ट एवं सेठ श्री फौजराज बांठिया पार्श्वनाथ जैन मंदिर ट्रस्ट, गंगाशहर व बीकानेर के तत्वावधान शुरू हुआ अंजन शलाका प्रतिष्ठा पंचाह्निका महोत्सव के प्रथम दिन बुधवार को विविध धार्मिक अनुष्ठान हुए।
भगवान श्री पार्श्वनाथ मंदिर जीर्णोंद्धार ट्रस्ट के अध्यक्ष धनपत सिंह बांठिया ने बताया कि बुधवार को गच्छाधिपति, गणिवर्य, मुनि व साध्वीवृंद के सान्निध्य में भक्ति संगीत के साथ विविध आयोजन हुए। महोत्सव के लिए अस्थाई स्थापित वाराणसी नगर विद्या निकेतन भवन में स्थापित कुशल कांति नगर का शुभारंभ गच्छाधिपति आचार्य जिन मणि प्रभ सूरिश्वरजी के सान्निध्य में हुआ। अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रथम दिन वेदिका पूजन, परमात्मा का वेदी स्थापना, कुंभ स्थापना, दीप स्थापना, ज्वारारोपण, जलयात्रा, भैरव पूजन, षोडश विद्यादेवी पूजन, 64 योगिनी पूजन, नंदावर्त पूजन, पाटला, नवग्रह, दश दिग्पाल व अष्टमंगल पूजन, लघु सिद्धचक्रम तथा लघु वीशस्थानक पूजन हुआ।
गच्छाधिपति आचार्य श्री जिन मणि प्रभ सूरिश्वरजी ने वासक्षेप व मंदिर में स्थापित होने वाली 15 प्रतिमाओं का शुद्धिकरण किया। उन्होंने भगवान पार्श्वनाथ के च्यवन कल्याणक विधान मंत्रोचारण से करवाया तथा च्यवन कल्याणक के महत्व को बताया। भगवान पार्श्वनाथ के माता-पिता, इंद्र इंद्राणी स्थापना की गई। विधिकारक हेमंत भाई की टीम ने विभिन्न धार्मिक विधान करवाएं वहीं मुंबई संगीतकार नरेन्द्र भाई की टीम ने परमात्मा के च्यवन कल्याणक सहित विभिन्न भजनों की प्रस्तुतियां दी। भगवान पार्श्वनाथ की च्यवन कल्याणक विधान में दिल्ली उतर के पुलिस कमीशनर राजा बांठिया सहित फौजराज बांठिया परिवार के सदस्यों ने विभिन्न विधान करवाएं ।
बांठिया ने बताया कि महोत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को सुबह नौ बजे भगवान के च्यवन व जन्म कल्याणक उजवणी, चौदह स्वप्न दर्शन, स्वप्न फल कथन, छप्पन दिक्ककुमारी महोत्सव, इंद्रासन कंपन, सुघोषा घंट वादन, इंद्र महोत्सव, मेरू पर्वत पर 250 अभिषेक व दोपहर दो बजे श्री पार्श्वनाथ पंच कल्याणक पूजा होगी। महोत्सव के तीसरे दिन 6 फरवरी को सुबह साढ़े सात बजे जिनालय मं परमात्मा के 18 अभिषेक, ध्वजदंड, कलशादि अभिषेक , सुबह दस बजे प्रिय दासी द्वारा बधाई, भूवा फूफा द्वारा नाम स्थापना, पाठशाला गमन, परमात्मा का विवाह, मायरा, राज्याभिषेक, नवलोकान्ति देवों का आगमन तथा प्रार्थना। शाम छह बहे मेहंदी सांझी का कार्यक्रम होगा।
उन्होंने बताया कि 7 फरवरी 25 को भव्य वरघोड़ा (रथ-शोभायात्रा) बांठिया चौक से रवाना होकर महोत्सव स्थल (वाराणसी) नगरी में दीक्षा कल्याणक विधान तथा मध्य रात्रि शुभ मुर्हूत में अधिवासना-अंजनविधान होगा। महोत्सव के पांचवें दिन 8 फरवरी 26 को मंगल मुर्हूत में परमात्मादि की महा मंगलकारी 15 प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा होगी। इसी दिन खरतरगच्छाधिपति श्री जिनमणिप्रभ सागर सूरिश्वरजी का मांगलिक, शाही करबा और फले चुंदड़ी, दोपहर में अष्टोत्तरी शांति स्नात्र महापूजन होगा। तेरापंथ भवन, (अस्थाई नाम कुशल कांति नगर) में स्टेज कार्यक्रम पांच दिन होंगे। जिनालय के द्वार का उद्घाटन 9 फरवरी को सुबह शुभ मुर्हूत में होगा। दोपहर को जिनालय में सतर भेदी पूजा भक्ति संगीत के साथ होगी।
मंदिर में ये हुई है प्रतिमाएं स्थापित
गंगाशहर के 177 वर्ष प्राचीन जीर्णेद्धारोपरान्त नवनिर्मित त्रिशिखरीय शिखरबद्ध जिनालय में श्री सांवलिया पार्श्वनाथ भगवान सहित 15 नूतन व प्राचीन प्रतिमाओं की अंजन शलाका-प्रतिष्ठा 8 फरवरी 26 को मंदिर के गर्भ गृह में मूलनायक सांवलिया पार्श्वनाथ, पदमप्रभु व वासुपुज्य स्वामी की, कोली मंडप में महावीर स्वामी, गौतम स्वामी की, रंग मंडप में खाडासन भगवान आदिनाथ व शांतिनाथ की , गोखलों में देवी पदममावती, चक्रेश्वरी देवी व सरस्वती देवी की, रंग मंडप के दूसरे गोखले में शिखरजी की, भोमियाजी की, बटूक भैरव व नाकोड़ा भैरव की प्रतिमा, मंदिर के दोनों ओर युग प्रधान दादा गुरुदेव पार्श्वचन्द्र सूरिश्वरजी की तथा योगीराज शांति गुरुदेव की प्रतिमा की स्थापना की गई है।
मंदिर व मार्ग में सजावट
भगवान श्री पार्श्वनाथ मंदिर जीर्णोंद्धार ट्रस्ट के अध्यक्ष धनपत सिंह बांठिया ने बताया कि गंगाशहर के कुम्हारों के मोड़ से रामपुरिया विद्या निकेतन भवन तथा मंदिर में रोशनी व सूरत से आए कलाकारों ने दीपकों, रंग बिरंगी रोशनी तथा फूलों से सजावट की है। सफेद संगमरमर के जिनालय को देखने के लिए सुबह से शाम तक लोगों का हजूम उमड़ रहा है। बीकानेर जिले के साथ देश के विभिन्न प्रमुख शहरों में प्रवास कर रहे फौजराज बांठिया परिवार के सदस्य बीकानेर पहुंचे है।




























