
श्री श्याम धाम मंदिर, बीकानेर
“रंग रंगीला श्री श्याम फागोत्सव” भक्ति, उल्लास और श्रद्धा के साथ संपन्न
बीकानेर, 28 फरवरी 2026 (शनिवार, द्वादशी)। फाल्गुन माह की पावन द्वादशी पर श्री श्याम धाम मंदिर में आयोजित “रंग रंगीला श्री श्याम फागोत्सव” श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ धूमधाम से संपन्न हुआ। दोपहर 2:00 बजे से प्रभु इच्छा तक चले इस भव्य आयोजन में श्याम प्रेमियों का सैलाब उमड़ पड़ा और संपूर्ण मंदिर परिसर भक्तिरस में सराबोर हो गया।
प्रन्यास सदस्य ओम जिंदल एवं अध्यक्ष के.के. शर्मा ने बताया कि इस विशेष अवसर पर देश के ख्यातनाम भजन कलाकारों ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से वातावरण को पूर्णतः श्याममय बना दिया। भजन संध्या में राहुल शर्मा (कोलकाता), दुर्गा गामड़ (इंदौर), सुनीता बागड़ी (श्रीगंगानगर) एवं अजय म्यूजिकल ग्रुप (जयपुर) ने एक से बढ़कर एक भावपूर्ण भजन प्रस्तुत किए।
जब मंच से “🙏 हारे के सहारे, बाबा श्याम हमारे 🙏” और “घणा जना ने सेठ बनायो, अबकी बारी मेरी है” जैसे भजन गूंजे, तो श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। पूरा मंदिर परिसर जयकारों से गूंजायमान हो गया और भक्तजन भक्ति की मस्ती में सराबोर दिखाई दिए।
विशेष आकर्षण रहे मनोहारी दृश्य
सत्यम ग्रुप आर्ट, सरदारशहर द्वारा प्रस्तुत आकर्षक झांकियों ने सभी का मन मोह लिया। दिल्ली से विशेष रूप से मंगवाए गए सुगंधित पुष्पों से बाबा का भव्य दरबार सजाया गया तथा अलौकिक श्रृंगार किया गया। श्याम प्रेमियों के साथ बाबा की पुष्पों की होली खेली गई। इत्र की वर्षा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय और सुगंधित बना दिया।
मंदिर एवं परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था। श्रद्धालु सजावट की छटा निहारते हुए भक्ति में लीन नजर आए। फाल्गुन की द्वादशी को श्याम बाबा के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है, इसी कारण बड़ी संख्या में भक्तजन दर्शन हेतु पहुंचे।
छप्पन भोग और प्रसाद व्यवस्था
इस पावन अवसर पर बाबा को छप्पन प्रकार का भोग अर्पित किया गया। संकीर्तन के पश्चात सभी श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसाद की सुसज्जित व्यवस्था की गई। मंदिर के प्रन्यासी सुरेश अग्रवाल ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुरक्षा, पार्किंग, पेयजल एवं प्रसाद वितरण की समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
समिति ने सभी श्याम प्रेमियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में अधिकाधिक संख्या में भाग लेने की अपील की।
संपूर्ण वातावरण में गूंजता रहा—
“हारे के सहारे, बाबा श्याम हमारे”




























