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बॉर्डर क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं, स्थायी योगा केंद्र व जन औषधि केंद्र की जरूरत — परमेश्व अग्रवाल
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बॉर्डर क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं, स्थायी योगा केंद्र व जन औषधि केंद्र की जरूरत — परमेश्व अग्रवाल ( राष्ट्रीय परिषद सदस्य, स्वदेशी जागरण मंच )
बीकानेर। स्वावलंबन केंद्र मोहता चौक बीकानेर में आयोजित स्वदेशी जागरण मंच की बैठक मे सीमावर्ती क्षेत्रों के स्वास्थ्य, योग एवं रोजगार से जुड़ी व्यवस्थाओं की स्थिति पर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय परिषद सदस्य स्वदेशी जागरण मंच बीकानेर के परमेश्व अग्रवाल तथा विभाग पूर्णकालिक रघुवीर शर्मा ने बीकानेर जिले के बॉर्डर क्षेत्रों की जमीनी स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक के दौरान विभाग पूर्णकालिक रघुवीर शर्मा द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं, योग व्यवस्था तथा रोजगार की स्थिति का गहन अध्ययन शामिल था। इस रिपोर्ट के माध्यम से बैठक में उपस्थित सदस्यों को बीकानेर जिले के कई बॉर्डर क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया गया।
रिपोर्ट में बताया गया कि बीकानेर जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों जैसे बज्जू, खाजूवाला, छतरगढ़ और राववाला सहित कई राजस्व ग्रामों में आज भी पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। कई सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है, वहीं सोनोग्राफी, एक्स-रे मशीन, एम्बुलेंस और ट्रॉमा सेंटर जैसी अत्यंत आवश्यक सुविधाओं का अभाव भी सामने आया है, जिसके कारण ग्रामीणों को उपचार के लिए दूर-दराज शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
बैठक में यह महत्वपूर्ण सुझाव रखा गया कि प्रत्येक तहसील स्तर पर स्थायी योगा केंद्र स्थापित किए जाएं तथा सभी सरकारी अस्पतालों में आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था और जन औषधि केंद्र अनिवार्य रूप से शुरू किए जाएं। इससे आमजन को सस्ती और सुलभ दवाइयां उपलब्ध हो सकेंगी और स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा भी मजबूत होगा।
इसके साथ ही यह भी प्रस्ताव रखा गया कि सभी राजस्व ग्राम पंचायतों में योगा केंद्र और जन औषधि केंद्र स्थापित किए जाएं, जहां प्रशिक्षित योगा प्रशिक्षकों की स्थायी नियुक्ति हो। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में निरोगी जीवनशैली को बढ़ावा मिलेगा, लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी तथा बीमारियों में कमी आने से अस्पतालों और डॉक्टरों पर अनावश्यक दबाव भी कम होगा।
राष्ट्रीय परिषद सदस्य परमेश्व अग्रवाल ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए बॉर्डर एरिया डवलपमेंट फण्ड (BADP) का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा विधायक निधि, सांसद निधि तथा विभिन्न कंपनियों के CSR फण्ड के माध्यम से भी योगा केंद्र, जन औषधि केंद्र, चिकित्सा उपकरण, एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास किया जा सकता है।
विभाग पूर्णकालिक रघुवीर शर्मा ने बताया कि बॉर्डर एरिया में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ रोजगार सृजन के लिए भी बड़े स्तर पर अभियान चलाने की आवश्यकता है। योगा केंद्रों, आयुर्वेद सेवाओं और जन औषधि केंद्रों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हो सकते हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
बैठक में यह भी माना गया कि यदि इन सुझावों पर गंभीरता से अमल किया जाए और केंद्र व राज्य सरकार के स्तर पर समन्वित योजना बनाई जाए, तो बीकानेर जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक विकास के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन संभव है।

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Gordhan Soni

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