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आज महिला दिवस की पूर्व संध्या और आशारतन मनोपुष्पा संस्थान द्वारा घर घर जाकर सेवानिवृत शिक्षिकाओं का सम्मान किया गया।

आज महिला दिवस की पूर्व संध्या और आशारतन मनोपुष्पा संस्थान द्वारा घर घर जाकर सेवानिवृत शिक्षिकाओं का सम्मान किया गया।संस्थान की अध्यक्ष ज्योति बोड़ा और निदेशक अनिल बोड़ा उप जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक मुख्यालय द्वारा सम्मान पत्र मोमेंटो और दुपट्टे द्वारा स्वागत अभिनन्दन किया गया । संस्थान द्वारा प्रतिवर्ष महिला दिवस की पूर्व संध्या पर यह समान समाज की विशिष्ट शिक्षिकाओं और समाज सेवा करने वाली महिलाओं को दिया जाता हे जो लगातार तीसरे वर्ष दिया गया।
85 वर्षीय अध्यापिका बुला देवी हर्ष भाव विभोर हो अपने शिक्षिका काल के कई संस्मरण सुनाने लगी तो तो 82 वर्षीय तुलसी स्वामी मैडम अभिभूत हो गई 78 वर्षीय मनोहरी स्वामी जो अध्यापिका रही हे और गंभीर बीमारी से ग्रस्त हे सम्मान लेने हिम्मत के साथ बिस्तर से उठ बैठ गई।
उर्मिला भोजक के आंखों मे खुशी के आंसू टपक पड़े तो वीणा हर्ष अपना सम्मान पत्र देख ह्रदय से खुश हो गई। इसी क्रम में शकुंतला देवी आचार्य अध्यापिका ने अपने संस्मरण कहते बताया कि किस प्रकार 15 वर्ष पूर्व तक उनके सेवा काल में नैतिक शिक्षा पर भी अध्यापन के साथ पूरा जोर दिया जाता था तो 83 वर्षीय कमला देवी भादानी ने पूरे सेवाकाल में अपने अनुभवों को साझा किया, सेवानिवृत बुलादेवी ओझा अपना सम्मान देख चहक उठी और अपने शिक्षिका काल का से गौरव माना तो विज्ञान की वरिष्ठ अध्यापिका रही संतोष व्यास ने सम्मान का आभार व्यक्त करते हुए अपने सेवाकाल में हमेशा विद्यालय में उपस्थित रहने से संतुष्टि मिलती थी के अनुभव बताए।
एकमात्र युवा पूर्व पार्षद सुनीता व्यास को उनके शानदार वार्ड में समग्र कार्य और साहस के लिए सम्मानित किया गया।
ऐआरएमपी संस्थान की अध्यक्षा ज्योति बोड़ा और निदेशक अनिल बोड़ा ने घर पर जाकर और योग्यता, उपलब्धियों के आधार पर इन 10 विशिष्ट महिला शक्ति का लगातार तीसरे वर्ष अपनी तरफ से सम्मान किया जो आगे भी लगातार जारी रहेगा और न केवल शिक्षा बल्कि अन्य सामाजिक सहभागिता वाली महिलाओं का मुख्य रूप से अनुभवी वयोवृद्ध महिलाओं का सम्मान किया जाएगा।

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