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केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया
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बीकानेर, 8 मार्च। आईसीएआर–केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान (CIAH) में “गिव टू गेन: कृषि एवं विज्ञान में महिलाओं का सशक्तिकरण” विषय के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् तथा आईसीएआर गीत के साथ किया गया।कार्यक्रम की आयोजक डॉ. अनीता मीना ने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, महिला कृषकों, विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. जगदीश राणे ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में जुड़कर सभी प्रतिभागियों को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कृषि एवं विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है और उनके योगदान से कृषि क्षेत्र में नवाचार तथा विकास को नई दिशा मिल रही है।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। डॉ. (श्रीमती) ज्योत्सना शर्मा, कंसल्टेंट, जेआईएसएल, जलगांव एवं पूर्व प्रधान वैज्ञानिक (पादप रोग विज्ञान), आईसीएआर–राष्ट्रीय अनार अनुसंधान केंद्र, सोलापुर ने कृषि एवं अनुसंधान के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका और उनके बढ़ते योगदान पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक अनुसंधान और कृषि नवाचार में महिलाओं की भागीदारी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण मदद मिल रही है।

इसी क्रम में डॉ. कनक लता, प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) पंचमहल, गुजरात ने अर्ध-शुष्क एवं शुष्क क्षेत्रों में बागवानी आधारित उद्यमिता के माध्यम से महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि यदि महिलाओं को बागवानी, प्रसंस्करण एवं विपणन से जुड़े प्रशिक्षण दिए जाएं तो वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

इस अवसर पर कार्यक्रम की आयोजक डॉ. अनीता मीना ने टीएसपी (जनजातीय उपयोजना) क्षेत्र की महिला कृषकों के सशक्तिकरण के लिए संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों के प्रसार एवं उनके उपयोग पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि इन तकनीकों के माध्यम से महिला किसान अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ आधुनिक कृषि पद्धतियों को भी अपनाने में सक्षम हो रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा किसानों और प्रतिभागियों को विभिन्न तकनीकी विषयों पर भी जानकारी दी गई। इसमें खजूर की फसल की कटाई उपरांत प्रबंधन, पॉलीहाउस में सब्जी उत्पादन, नर्सरी प्रबंधन तथा अल्प-प्रयुक्त फल फसलों के पोषण महत्व जैसे विषय प्रमुख रहे। वैज्ञानिकों ने इन तकनीकों को अपनाकर कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में कुल 48 प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। अंत में सभी प्रतिभागियों ने कृषि एवं विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को और मजबूत बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।

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Gordhan Soni

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