

बीकानेर । महायोगी अवधूत संत श्री श्री 1008 श्री पूर्णानन्दजी महाराज की 60 वीं पुण्यतिथि पर श्री बंशीलाल राठी की बगीची, भीनासर स्थित समाधि स्थल पर धार्मिक आयोजनों की विधिवत शुरुआत शनिवार को बापजी की प्रतिमा का पूजन कर किया गया। इस दौरान सारड़ा परिवार की ओर से आयोजित यज्ञ में आहुति दी गई। वहीं 14 से 20 मार्च तक दोपहर २ बजे से शाम ५ बजे तक नानीबाई रो मायरो (संगीतमय भक्त माल कथा) का आरंभ शनिवार को किया गया। कथा व्यास परम पूज्य परमहंस महंत डॉ. रामप्रसाद जी महाराज, जोधपुर वाले ने वाचन करते हुए कहा कि नरसी मेहता गुजराती भक्त साहित्य की श्रेष्ठतम विभूति थे। साथ ही उन्होंने कहा कि भक्तों के बगैर भगवान की कथा हो ही नहीं सकती। महाराज जी ने नृसिह मेहता बधीर, गूंगा की जन्म की कहानी विस्तार से सुनाई। महाराज ने कहा कि भगवान शिव का आशीर्वाद जिसे प्राप्त हो जाता है, वह स्वयं तो फलता-फूलता ही है, परिवार को भी तार देता है। नृसिह के साथ भी ऐसा ही हुआ, भगवान को जब उसने याद किया, भगवान ने उसके सारे कष्ट हर लिए। इसलिए भगवान पर अविश्वास नहीं विश्वास के साथ स्मरण करो।
बापजी की जीवन वृत पर आधारित गैलरी का शुभारंभ किया
आयोजनकर्ता गौरीशंकर सारड़ा ने बताया कि शनिवार को बंशीलाल राठी बगेची में सारड़ा परिवार की ओर से बापजी के जीवन वृत पर प्रकाश डालती आर्ट गैलरी का शुभारंभ किया गया। गैलरी का शुभारंभ मुरली मनोहर धोरा, भीनासर से संत श्री श्यामसुंदर महाराज, कथा व्यास परमहंस महंत डॉ. रामप्रसाद महाराज के कर कमलों से हुआ।
इससे पूर्व सुबह रुद्राभिषेक हुआ और शिवशक्ति यज्ञ का आयोजन हुआ। रात को भक्ति संगीत संध्या का आयोजन भी होगा।




























