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एक हाथ नहीं होने के बावजूद ललिता सैनी ने जीता एशियाई ट्रायल में सिल्वर मेडल

एक हाथ नहीं होने के बावजूद ललिता सैनी ने जीता एशियाई ट्रायल में सिल्वर मेडल

एशियाई ट्रायल में बेंगलुरु में ललिता ने जीता सिल्वर मेडल
पूरे भारत में दूसरे नंबर पर रही जैवलिन में
कमजोरी को बनाई अपनी ताकत एक हाथ नहीं होने पर भी जैवलिन में सिल्वर मेडल जीता

बीकानेर। बेंगलुरु में 26 से 28 मई तक आयोजित एशियाई ट्रायल प्रतियोगिता में बीकानेर जिले की पैरा खिलाड़ी ललिता सैनी ने भाला फेंक (जैवलिन थ्रो) प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीतकर जिले और भारत का नाम रोशन किया।

ललिता सैनी ने एक हाथ नहीं होने के बावजूद अपनी कमजोरी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाकर यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने भाला फेंक स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर यह साबित कर दिया कि मजबूत हौसलों के आगे कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। उनकी इस सफलता से दिव्यांग खिलाड़ियों में नया उत्साह देखने को मिल रहा है।

एसएमएस दिव्यंग सेवा संस्था पैरा स्पोर्ट्स बीकानेर की अध्यक्ष मंजू गुलगुलिया ने बताया कि संस्था लगातार दिव्यांग खिलाड़ियों को निशुल्क खेल प्रशिक्षण, मार्गदर्शन एवं खेलों के प्रति प्रोत्साहित करने का कार्य कर रही है। संस्था का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग खिलाड़ियों को आत्मनिर्भर बनाना तथा बीकानेर में दिव्यांगों के लिए खेल सुविधाओं और व्यवस्थाओं को बढ़ावा देना है।

मंजू गुलगुलिया ने कहा कि ललिता सैनी की यह उपलब्धि सभी दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने हौसले और मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।

संस्था एवं खेल प्रेमियों ने ललिता सैनी को भाला फेंक प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीतने पर शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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Prakash Samsukha

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