एआई के दौर में मौलिक लेखन बचाना सबसे बड़ी चुनौती, पत्रकारिता जनहित और मूल्यों पर केंद्रित रहे- कुलगुरु दीक्षि

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने पर जार का परिसंवाद, मीडिया के बदलते परिदृश्य और चुनौतियों पर हुआ मंथन
खोजी पत्रकारिता, पत्रकार सुरक्षा कानून, जनसरोकार और युवा पत्रकारों के प्रशिक्षण पर वक्ताओं ने रखे विचार
बीकानेर // हिंदी पत्रकारिता दिवस की पूर्व संध्या पर जर्नलिस्टस एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (जार) जिला बीकानेर इकाई की ओर से शुक्रवार शाम को एक विचारोत्तेजक परिसंवाद का आयोजन किया गया। होटल वृंदावन रेजिडेंसी में आयोजित इस परिसंवाद में “मीडिया का बदलता परिदृश्य, एआई से उपजी चुनौतियां और हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों का गौरवशाली सफर” विषय पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, वरिष्ठ पत्रकारों, साहित्यकारों, जनप्रतिनिधियों और युवा पत्रकारों ने भाग लेकर पत्रकारिता के वर्तमान स्वरूप, उसकी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार रखे।
मुख्य अतिथि महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. मनोज दीक्षित ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता का इतिहास संघर्ष, साहस और सामाजिक सरोकारों से भरा रहा है। अंग्रेजी शासनकाल में सीमित संसाधनों और अनेक प्रतिबंधों के बावजूद पत्रकारों ने निर्भीकता के साथ अपनी बात समाज तक पहुंचाई। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने पत्रकारिता के स्वरूप को तेजी से बदला है। एआई के बढ़ते उपयोग से मौलिक लेखन प्रभावित हो रहा है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की आत्मा उसकी मौलिकता में निहित है और इसे बचाने के लिए पत्रकारों, शिक्षण संस्थानों तथा मीडिया संगठनों को मिलकर प्रयास करने होंगे।
मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार राजीव हर्ष ने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य जनहित की रक्षा और समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाना है। पत्रकारों को केवल घटनाओं की जानकारी देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समस्याओं की जड़ों तक पहुंचकर समाधान की दिशा में समाज और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहर में अतिक्रमण, जलाशयों की दुर्दशा, पर्यावरणीय संकट और आमजन से जुड़े मुद्दों पर लगातार गंभीर पत्रकारिता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की अपनी नैतिकता और मर्यादा होती है, इसलिए पत्रकारों को अपने सिद्धांतों और मूल्यों से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं करना चाहिए।
परिसंवाद की अध्यक्षता करते हुए जार के प्रदेशाध्यक्ष श्याम मारू ने कहा कि पत्रकारिता केवल रोजगार या व्यवसाय नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व है। पत्रकार समाज और शासन के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि आज मीडिया अनेक चुनौतियों से घिरा हुआ है, लेकिन पत्रकार यदि निष्पक्षता, ईमानदारी और सामाजिक सरोकारों को केंद्र में रखकर कार्य करेंगे तो पत्रकारिता का प्रभाव और विश्वसनीयता दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए।
भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य डॉ. सत्यप्रकाश आचार्य ने कहा कि पहले पत्रकारिता में विचारों और विश्लेषणों को विशेष महत्व दिया जाता था। समाचार पत्रों में प्रकाशित आलेख समाज को दिशा देने का कार्य करते थे, जबकि आज सूचनात्मक पत्रकारिता का प्रभाव अधिक दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल प्रेस विज्ञप्तियों के प्रकाशन तक सीमित नहीं होनी चाहिए। पत्रकारों को समाज के कमजोर वर्गों, जनसमस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहिए।
जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक डॉ. हरिशंकर आचार्य ने कहा कि डिजिटल युग और एआई का प्रभाव नई पीढ़ी के अध्ययन और लेखन कौशल पर पड़ रहा है। ऐसे समय में युवाओं को पढ़ने और स्वयं लिखने के लिए प्रेरित करना आवश्यक है। उन्होंने बीकानेर की समृद्ध पत्रकारिता परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां की पूर्व पीढ़ी ने प्रतिबद्धता और सामाजिक चेतना के साथ पत्रकारिता की है, जिससे वर्तमान पीढ़ी को सीख लेने की जरूरत है।
राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने खोजी पत्रकारिता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि पत्रकारों को केवल सूचनाएं प्रकाशित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि तथ्यों की तह तक जाकर वास्तविकता सामने लानी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी विभाग द्वारा बार-बार एक ही प्रकार की सूचनाएं जारी की जा रही हैं तो पत्रकारों को उसकी वास्तविक स्थिति की पड़ताल भी करनी चाहिए। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए पत्रकारों से तथ्य आधारित और जनहितकारी पत्रकारिता करने का आह्वान किया।
वरिष्ठ पत्रकार हरीश बी. शर्मा ने पत्रकार सुरक्षा कानून की आवश्यकता को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पत्रकारों को चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन आज भी पत्रकारों को पर्याप्त सुरक्षा और संरक्षण प्राप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि अनेक पत्रकार विषम परिस्थितियों में कार्य करते हैं और कई बार दबाव तथा जोखिम का सामना भी करते हैं। उन्होंने युवा पत्रकारों से वरिष्ठ पत्रकारों के अनुभवों का लाभ लेने का आग्रह किया तथा जार से समय-समय पर पत्रकारिता प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित करने की अपील की।
नेहरू शारदा विद्यापीठ कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत बिस्सा ने कहा कि पत्रकारिता का क्षेत्र संघर्ष और समर्पण का क्षेत्र है। जो व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी निष्पक्ष रहकर समाज के लिए कार्य करता है, वही वास्तविक पत्रकार कहलाने का अधिकारी है। उन्होंने पत्रकार संगठनों से प्रशिक्षण, संवाद और अध्ययन की परंपरा को मजबूत बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन जार के बीकानेर जिला अध्यक्ष प्रमोद आचार्य ने किया। उन्होंने अतिथियों का स्वागत करते हुए हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख किया तथा अंत में सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
इन वक्ताओं ने भी रखे विचार
परिसंवाद में बीकानेर प्रेस क्लब अध्यक्ष कुशाल सिंह मेड़तिया, संजय आचार्य वरुण, राजा ओझा, सुमेस्ता बिश्नोई, गौरीशंकर प्रजापत तथा व्याख्याता विशाल सोलंकी सहित अन्य वक्ताओं ने भी पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। सभी भक्तों ने एक और में कहा कि निर्भीक व निष्पक्ष पत्रकारिता ही पीड़ित व वंचित वर्ग का भला कर सकती है।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार रमजान मुगल, विक्रम जागरवाल, मोहन थानवी, शिव भादानी, राजेश छंगाणी, मुकेश पुरोहित, महावीर सिंह राजपुरोहित, आर.सी. सिरोही, महेंद्र जोशी, वीरेंद्र किराडू, अविनाश आचार्य, रेणुबाला सोलंकी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार, साहित्यकार, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।














