भाव पूर्वक एक दिन की कथा सुनने से सातों दिनों का पुण्य मिल सकता है
नोखा। यहां चांडक भवन में कान्हा गौ सेवा समिति और अर्केश्वर महादेव
शिवालय परिवार के तत्वाधान में 25 मई से चल रही श्रीमद भागवत कथा
में छठे दिन शनिवार को व्यासपीठ पर विराजित विद्वान पंडित महावीर
महाराज पंचारिया ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करने से जन्म जन्मांतरो

के कर्म बंधनों की निर्झरा कटती है और प्रभु में लीन होने के अवसर मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि एक दिन की कथा श्रवण से ही सातों दिनों का पुण्य लाभ मिल
सकता है भाव पूर्वक कथा सुननी चाहिए। कथा के छठे दिन कथा व्यासजी ने
महारास, कंस वध और कृष्ण रुक्मणी विवाह प्रसंगों की कथा सुनाई।
उन्होंने तत्वों, वरुण देव की महिमा को विस्तार से बताया। महाराज ने कहा कि भजन और भक्ति का दिखावा नहीं करना चाहिए। भक्ति सीखनी है तो गोपियों से सीखो। परलोक सुधारने के लिए धर्म मार्ग पर चलना चाहिए। आज के युग में मनुष्य सुबह से शाम तक और जीवन से मृत्यु तक अर्थ के पीछे दौड़ रहा है जबकि
मानव जीवन की सार्थकता प्रभु भक्ति में है। गोपियों और मीराबाई के जीवन
दर्शन से प्रभु भक्ति की शिक्षा ली जा सकती है। मीरा भजन गाती थी तब उनमें
राग, शब्द नहीं बल्कि भगवान के प्रति भाव होते थे। कथा के दौरान भजन
गायक कलाकार प्रसंगानुसार भजनों की प्रस्तुति देकर व जसवंतगढ़
के झाँखी कलाकार बाबूलाल टेलर द्वारा मन मोहक संजीव झाँखीयों का
मंचन करवाते हुए कथा में चार चांद लगाते हुए दर्शक श्रोताओं को भावविभोर
एवं मंत्र मुग्ध कर रहे हैं। छठे दिन झाँखी कलाकार ने संजीव झाँखी में मीराबाई के तंदुरे पर कृष्ण भगवान के दर्शन और दूसरी झाँखी में
कृष्ण रुक्मणी विवाह की झाँखी का मंचन व वरमाला करते हुए दर्शक श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। श्रीमती आरती करवा को मीराबाई के रूप में और गोपाल मालानी व उनकी पत्नि कृष्ण रुक्मणी की झाँखियों ने मन मोह लिया। छठे दिन की कथा में कलावती-संतोष चांडक व कान्ता-जगदीश
तापड़िया और सोनू-रामदेव राठी ने मुख्य श्रोता के रूप में कथा का पान किया।
कथा विराम पर हुक्मीचन्द विमलकुमार बजाज द्वारा श्रोताओं को प्रसाद वितरण किया गया।













