खेत बचाओ अभियान – एक राष्ट्रीय अभियान
देशव्यापी “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत आईसीएआर-केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान , बीकानेर के वैज्ञानिकों की एक टीम ने 09 जून 2026 को एमजीएमजी ग्रामों किलचू एवं उदयारामसर में किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. एम. के. जाटव, डॉ. एस. के. माहेश्वरी, डॉ. रामकेश मीना, डॉ. पवन कुमार तथा श्री लोकेश कुमार ने कृषि पर्यवेक्षक सुश्री सोनिया शर्मा के साथ मिलकर किया।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग, समेकित पादप पोषक तत्व प्रबंधन (IPNM), प्राकृतिक खेती, प्राकृतिक घोलों के निर्माण एवं उपयोग, जैविक एवं अकार्बनिक पोषक तत्व प्रबंधन, हरी खाद, मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग तथा मृदा स्वास्थ्य एवं कृषि उत्पादकता बढ़ाने हेतु टिकाऊ फसल संरक्षण उपायों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. एम. के. जाटव ने वैज्ञानिक अनुशंसाओं के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग के महत्व पर बल दिया। उन्होंने प्राकृतिक खेती के महत्व को रेखांकित करते हुए विभिन्न प्राकृतिक घोलों की तैयारी एवं उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को मृदा उर्वरता बनाए रखने, फसल उत्पादकता बढ़ाने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. एस. के. माहेश्वरी ने बागवानी फसलों में रोग प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों पर चर्चा करते हुए रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग को कम करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पौध-आधारित रोग नियंत्रण उपायों तथा पर्यावरण-अनुकूल प्रबंधन तकनीकों को अपनाने की सलाह दी, जिससे रोगों का प्रभावी नियंत्रण हो सके तथा पर्यावरणीय जोखिम एवं रासायनिक अवशेषों में कमी लाई जा सके।
डॉ. रामकेश मीना ने टिकाऊ पोषक तत्व प्रबंधन के लिए जैविक एवं अकार्बनिक उर्वरकों के संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने हरी खाद के महत्व को बताते हुए ढैंचा, ग्वार, मूंग तथा अन्य दलहनी फसलों को हरी खाद के रूप में उगाने की अनुशंसा की, जिससे मृदा की उर्वरता, जैविक पदार्थ की मात्रा तथा पोषक तत्वों की उपलब्धता में वृद्धि हो तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम की जा सके।
किसानों के साथ संवाद के दौरान डॉ. पवन कुमार ने मृदा में पोषक तत्वों की स्थिति का आकलन करने तथा खेत-विशिष्ट एवं संतुलित उर्वरक उपयोग सुनिश्चित करने के लिए नियमित मृदा परीक्षण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने बताया कि मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग से मृदा स्वास्थ्य बना रहता है, पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता बढ़ती है, अनावश्यक लागत में कमी आती है तथा टिकाऊ कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलता है।
श्री लोकेश कुमार ने बागवानी फसलों में टिकाऊ पोषक तत्व प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों पर चर्चा करते हुए किसानों को जैविक खाद, जैव उर्वरकों तथा उर्वरकों के संतुलित उपयोग को समेकित रूप से अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे दीर्घकालिक उत्पादकता एवं पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
संवाद सत्र के दौरान किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया तथा पोषक तत्व प्रबंधन से संबंधित अपनी समस्याओं एवं अनुभवों को साझा किया। इस दौरान यह पाया गया कि किसानों में संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती तथा जैविक पोषक स्रोतों के उपयोग संबंधी तकनीकी जानकारी की अभी भी पर्याप्त कमी है। किसानों ने स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण बीज एवं प्रमाणिक रोपण सामग्री की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी व्यक्त की।
किलचू गांव में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत वैज्ञानिक किसानों से संवाद करते हुए
किलचू गांव में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत वैज्ञानिक किसानों से पोषक तत्व प्रबंधन पर संवाद करते हुए।
उदयारामसर गांव में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत वैज्ञानिक किसानों से संवाद करते हुए
उदयारामसर गांव में वैज्ञानिक किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग (BUF) के बारे में जानकारी देते हुए।

















