भारत रा रण बांकुरों थे अमर हुज्यो रे…
.. उलटवांसियों का श्रेष्ठ उदाहरण हो इसलिए अपने दुखों का स्वयं ही बहुत बड़ा कारण हो … भारत रा रण बांकुरों थे अमर हुज्यो रे… मुसीबत झेले, मृत्यु से खेलें अंतिम दम तक.. ज़हर की सीसी में दवा ढूंढ रहा हूं,…. राष्ट्रीय कवि चौपाल की 547 वीं कड़ी *”आंतकवाद के खिलाफ हमारे जवान “* विषय … Read more