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भारत रा रण बांकुरों थे अमर हुज्यो रे…
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.. उलटवांसियों का श्रेष्ठ उदाहरण हो इसलिए अपने दुखों का स्वयं ही बहुत बड़ा कारण हो …

भारत रा रण बांकुरों थे अमर हुज्यो रे… 

मुसीबत झेले, मृत्यु से खेलें अंतिम दम तक..

ज़हर की सीसी में दवा ढूंढ रहा हूं,….

राष्ट्रीय कवि चौपाल की 547 वीं कड़ी *”आंतकवाद के खिलाफ हमारे जवान “* विषय पर केन्द्रित रही…  यानी आज़ ऐसे चार वीर बलिदानी हमारे राष्ट्रीय नायक रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रौशन सिंह, राजेन्द्र सिंह लाहिड़ी को समर्पित रही, आज के कार्यक्रम शुभारम्भ करते हुए रामेश्वर साधक ने स्व बौद्धिक में कहा कि नर से नारायण बनने का सुलभ राह यही कि आतंकियों को मारो जैसे राम कृष्ण ने धर्म संस्कृति सुरक्षा में किया। कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ हरिदास हर्ष ने स्व बौद्धिक में कहा कि.. शायद उलटवांसियों का श्रेष्ठ उदाहरण हो इसलिए अपने दुखों का स्वयं ही बहुत बड़ा कारण हो …  तथा देश भक्ति रचना के साथ साहित्य सभा में वीर योद्धाओं का जीवन्त स्वरूप दिखाया..   मुख्य अतिथि वैद्य विद्या सागर पंचारिया ने काव्यात्मक अपने भाव रखे बंगला देश में फैल रहा, साम्प्रदायिकता का जंग, हिंदुओं के अरमानों की हो रही दुर्दशा, सरदार अली परिहार  ने  ऊभो डाकी भरे सबड़का सररररर सप भ्रष्ट राजनेताओं पर कड़ा प्रहार किया…  इससे पूर्व विशिष्ट अतिथि मनमोहन कपूर  : शेष महेश दिनेश गणेश जाहि निरंतर गावें आध्यात्म रचना के साथ भग्वद् वंदना की
    लीलाधर सोनी :  भारत रा रण बांकुरों थे अमर हुज्यो रे मातृ भुमि रै कण कण माथै नाम लिख्यो रे,…   कैलाश टाक :  ज़हर की सीसी में दवा ढूंढ रहा हूं, कटे शजर में हवा ढूंढ रहा हूं। मिल जाए कहीं आजाद भगत और अशफाक, ज़हन के बीमारो में मर्द जवां ढूंढ रहा हूं,…   कृष्णा वर्मा  :  गौरव और वीरता की झलक , …   बाबू बम चकरी : सञ्चालक रो दुखडो समझ ना कोई पाय,,,,सुणा सुणा ए घरे पूग जा बो रीतो ही रह जाय,,     राजस्थान की महिमा न्यारी, इसके रंग हजार,..  तुलसी राम मोदी :  जख्मों का तुम कोई मरहम ढुंढो एक दार्शनिक रचना सुनाई

रामेश्वर साधक  :  मुसीबत झेले, मृत्यु से खेलें अंतिम दम तक। कर प्राण न्यौछावर, विजय के लहराए परचम।।     के के व्यास  :  कदम बढ़ाता चल के पीछे देखना नहीं,   थां अच्छी पगड़ी ने बेची आछो घुड़लो घेरयो राज, … राजकुमार ग्रोवर :  ऐसी नगरी को कहते हैं,अंधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा,…   महबूब अली देशनोक  एक पींपल लगाना सौ धर्मशाला का धर्म मिलता है .. ओम प्रकाश भाटी ने सरहद की आवाज शीर्षक पर प्रभावी प्रस्तुति दी, …कैलाश चारण देशनोक  झनक झनक तौरी बाजे पायलिया,.. गीत संगीत मय गाकर सदन का मन मोह लिया

आज के कार्यक्रम में 15 साहित्य वृंद ने भागीदारी दी व  महेश कुमार हर्ष, घनश्याम सौलंकी, वेदांत भाटी, भवानी सिंह शिवबाड़ी, साकिर पत्रकार, छोटू खां आदि कई गणमान्य साहित्यानुरागी उपस्थित रहे कार्यक्रम संचालन चुटिले अंदाज में हास्य-व्यंग्यकार बाबू बमचकरी ने किया जबकि आभार  साधक ने व्यक्त किया

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Gordhan Soni

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