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शासन श्री साध्वी आशावती जी का देवलोकगमन: गंगाशहर में ओसवाल मुक्तिधाम में हुआ अग्नि संस्कार; भावभीनी स्मृति सभा में गूंजा उनके 65 वर्षों के तप और समता का गौरव
शासन श्री साध्वी आशावती जी  भीषण शारीरिक वेदना को ‘समभाव’ से जीता

गंगाशहर (बीकानेर), 13 जून। जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के अधिनायक आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या शासन श्री साध्वी आशावती जी का शुक्रवार, 12 जून 2026 को देवलोकगमन हो गया। उनके महाप्रयाण के बाद शनिवार को गंगाशहर में एक भावपूर्ण स्मृति सभा का आयोजन किया गया, जिसमें धर्मसंघ के संतों, साध्वियों और प्रबुद्ध श्रावकों ने उनके संयम, तप और अप्रतिम समता भाव को याद करते हुए भावभीनी अंजलि अर्पित की। इससे पूर्व, शुक्रवार सायं शांति निकेतन सेवा केंद्र से उनकी बैकुंठी यात्रा (अंतिम यात्रा) प्रारंभ होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई पुरानी लेन ओसवाल मुक्तिधाम पहुंची, जहां पूरे धार्मिक विधि-विधान और जयकारों के बीच उनकी पार्थिव देह का अग्नि संस्कार संपन्न हुआ।

65 वर्षों का बेजोड़ संयमी जीवन और इतिहास

तेरापंथी सभा के मंत्री जतनलाल संचेती ने साध्वी जी का जीवन परिचय प्रस्तुत करते हुए बताया कि साध्वी आशावती जी का जन्म नोखा तहसील के उदासर गांव में श्रावक बाघमल जी और माता गवरा देवी बैद के यहां हुआ था। विक्रम संवत 2006 में आपका विवाह नोखा के रावतमल जी भूरा के साथ हुआ। सांसारिक जीवन के बीच आपके भीतर प्रबल वैराग्य भाव जाग्रत हुआ, जिसके बाद आपने गृहस्थ जीवन का परित्याग कर दिया। आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा विक्रम संवत 2017 (29 जून 1960) को राजस्थान के केलवा में युगप्रधान आचार्य श्री तुलसी के कर-कमलों से आपने जैन दीक्षा अंगीकार की। विशेष बात यह है कि आप जैन शासन की महान साध्वीप्रमुखा स्व. कनकप्रभा जी की सह-दीक्षित साध्वी थीं। आपने 65 वर्षों से अधिक समय तक अत्यंत कठोर और अनुकरणीय संयम जीवन का पालन किया।
भीषण शारीरिक वेदना को ‘समभाव’ से जीता
स्मृति सभा में संतों और साध्वियों ने उनके उच्च मनोबल और साधना को रेखांकित किया।

मुनि श्री अमृत कुमार जी ने कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ में सेवा की परंपरा बेजोड़ है। साध्वी जी ने अपना संपूर्ण जीवन संयम के मार्ग पर चलते हुए इस भव पार लगाने में सफल किया।

सेवा केन्द्र व्यवस्थापिका साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी ने कहा कि भगवान महावीर ने ठाणं सूत्र में चार प्रकार की सुखशय्या का विवेचन किया है 1 स्वलाभ में संतोष 2. परलाभ में अनाशंसा 3. कामभोगों में अनाशक्ति 4. स्वयंउद्भव वेदना में समभाव। साध्वी श्री आशावती जी ठाणं सूत्र की चोथी सुखशय्या में लीन थी। उनके असाता वेदनीय कर्म का भयंकर उदय हुआ फिर भी उस वेदना को उन्होंने समभावों से सहन किया, कभी भी पीड़ा से घबराई नहीं अपितु पूर्व अर्जित कर्मों को समता से सहन कर महान कर्मों की निर्जरा की है। साध्वी श्री जी की समता बेजोड़ थी। उन्होंने यहां पर ही कष्टों को सहन करके महान लाभ कमाया। उन्होंने समता भाव से कष्ट सहकर महान कर्मों की निर्जरा की।

स्मृति सभा में बोलते हुए साध्वी श्री सम्यक्तव यशा जी ने कहा कि साध्वी आशावती जी का मनोबल बहुत ऊंचा था शारीरिक कष्टों को बहुत समता से सहन किया। साध्वी कल्पयशा जी ने कहा कि स्मृति सभा मनाने का मेरी दृष्टि में दो कारण हैं। एक उनके गुणों का स्मरण करना, उनके गुणों को संगृहीत करके अनुसरण करना। अनेक बताये मार्ग पर चलना। दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि हमें यह जागरूक करना की एक दिन हमारी भी स्मृति सभा हो सकती है।यह आत्म अवलोकन करने का क्षण होता है कि हमने भी कोई ऐसा काम किया कि नहीं जो लोग हमारी स्मृति सभा में उसका उल्लेख कर सके। हमारे भीतर में भी कोई गुण उनको दृष्टि में आ जाये। आपने साध्वी श्री चांदकुमारी की बहुत सेवा की, उनके तन का कपड़ा बनकर रहे। आप ने धर्म संघ की बहुत प्रभावना की।  स्मृति सभा हमारे लिए आत्म-अवलोकन का क्षण है कि हम भी उनके गुणों का अनुसरण करें।

मुनि श्री उपशम कुमार जी ने कहा कि साधु का असली संघर्ष बाहरी जगत से नहीं, बल्कि भीतरी जगत से होता है। साध्वी जी ने अपनी सहनशीलता से भीतरी संघर्ष को जीतकर विजय श्री का वरण किया।

तेरापंथ न्यास के ट्रस्टी लूणकरण छाजेड़ ने सराही ‘सेवा’

स्मृति सभा में विशेष रूप से विचार व्यक्त करते हुए तेरापंथ न्यास के ट्रस्टी जैन लूणकरण छाजेड़ ने कहा कि शासन श्री साध्वी आशावती जी  भीषण शारीरिक वेदना को ‘समभाव’ से जीतकर जीवन सफल किया । साध्वी आशावती जी शासनमाता कनकप्रभा जी की सह-दीक्षित साध्वी थीं, और साध्वीप्रमुखा जी स्वयं समय-समय पर इस गौरवपूर्ण संस्मरण का उल्लेख करती थीं। छाजेड़ ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से वे शारीरिक व मानसिक रूप से अस्वस्थ थीं, और इस अवस्था में सेवा केंद्र की सेवार्थी साध्वियों ने जो निष्काम सेवा की, वह अद्भुत और वंदनीय है। ऐसी सेवा का क्रम केवल तेरापंथ धर्मसंघ में ही देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि इस परम सेवा केंद्र में दर्शनार्थ आना भी किसी पावन तीर्थ यात्रा से कम नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने दायित्व निभाने के लिए तेरापंथी सभा तथा चिकित्सा सेवा से जुड़े नर्सिंग स्टाफ के अनुकरणीय समर्पण का भी अभिनंदन किया।

विभिन्न संस्थाओं और श्रावकों ने दी अंजलि
सभा के दौरान उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनि श्री कमल कुमार जी द्वारा प्रेषित विशेष संदेश का वाचन संगठन मंत्री कमल भंसाली ने किया। इस शोक सभा में तेरापंथ सभा के पूर्व अध्यक्ष अमर चंद सोनी, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम (TPF) से रतन लाल छल्लाणी, तेरापंथ युवक परिषद (तेयुप) से देवेंद्र डागा, अणुव्रत समिति से कन्हैयालाल बोथरा, शांति प्रतिष्ठान से किशन बैद, महिला मंडल से रेखा चोरड़िया तथा साध्वी जी के संसारपक्षीय परिवार से हंसराज भूरा, ईशा बैद और गोपाल लूणावत सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और श्रावकों ने उपस्थित होकर शासन श्री के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किए।
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Gordhan Soni

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