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हरिद्वार,पुष्कर व कोलायत में
बीकानेर के श्रद्धालुओं का सैलाब, सोममति अमावस्या कल

बीकानेर, 14 जून। पुरुषोतम माह की सोमवती अमावस्या पर स्नान, ध्यान, पूजा अर्चना अर्चना करने के लिए बीकानेर के हजारांे की तादाद में श्रद्धालुओं ने हरिद्वार, पुष्कर व कोलायत में शनिवार को ही डेरा डाल लिया। हरिद्वार मेें तो गीता भवन, कनखल स्थित बीकानेर के धनीनाथ गिरि मठ पंच मंदिर के अधिष्ठाता स्वामी सोमेश्वरा नंद भारती के नाम के सोमेश्वर धाम, महामंडलेश्वर संतोषी माता के आश्रम, मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार भवन सहित सभी होटले, भवन व धर्मशालाएं खचाखच भरी है। ऋषिकेश गीता भवन व परमार्थ भवन सहित कई धर्मशालाओं में श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए टेंट तनवाएं गए है।
बीकानेर से हरिद्वार व पुष्कर जाने वाली सभी रेलगाड़ियां व बसें यात्रियों से फूल है, किसी रेलगाड़ी में आरक्षण नहीं मिल रहा। बीकानेर के नत्थूसर गेट गोकुल सर्किल व पुष्करणा स्टेडियम के पास से शनिवार को करीब 20 बसें सहित समूचे बीकानेर से पुष्कर व हरिद्वार के लिए नियमित के साथ करीब 60 के करीब बसें रवाना हुई। बीकानेर से 50 पंडितों का दल शुक्रवार को रेलवे से हरिद्वार वेद मंत्रोच्चारण करते हुए रवाना हुआ। वेद पाठी पंडितों का मीना वाधवानी ने सत्कार कर शुभ भावनाओं के साथ रवाना किया।
बीकानेर के लक्ष्मीनाथ मंदिर में अनेक बार कथा प्रवचन कर चुकी महामंडलेश्वर संतोषी माता के कनखल आश्रम में व बीकानेर के धनीनाथ गिरि मठ पंच मंदिर के अधिष्ठाता महामंडलेश्वर स्वामी विशोका नंद भारती की सोमेश्वर धाम में चल रही पुरुषोतम माह की विशेष कथा चल रही विशेष कथाएं सुनने के लिए बीकानेर के श्रद्धालु पिछले एक माह से वहां ठहर कर धर्म लाभ ले रहे है। सभी कथाओं व धार्मिक आयोजनों का समापन सोमवार को होगा।
महा मंडलेश्वर संतोषीमाता प्रवचन
हरिद्वार के कनखल में महामंडलेश्वर संतोषी माता ने रविवार को पुरुषोतम माह  में 15 दिवसीय भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में कहा कि सतो, रजो व तमो गुण में सतो गुण को बढ़ाएं । गाय बछड़े के प्रेम की तरह परमात्मा के प्रति समर्पण रखतेे हुए साधना करें। बाहरी आडम्बरों से बचें । मंदिरों में प ईश्वर की साक्षा प्रतिकृति के रूप में प्रतिमाओं के दर्शन करें।  लोग मंदिरों में दर्शन के वक्त मूर्ति की प्रशंसा करते हे कहते है मार्बल, सोने चांदी या काष्ठ की मूर्ति है। मंदिर में जाकर  भगवान का दर्शन करना चाहिए न की जड़ वस्तुओं का । दूसरों के गुणदोष और भगवान के सामने प्रेमपूर्वक श्रद्धा व भक्ति दर्शन कर दृष्टि को कृतार्थ करें। मंदिर में आंखे मूंदकर खड़े नहीं हो। संसार तथा संसार के विषय भोग वस्तुओं की मांग मंदिर में नहीं करें। मंदिर में ठाकुरजी को निहारो। उनके चरण से लेकर मुख तक भाव से दर्शन करें। मंदिर नहीं जा सकने वाले अपने घरों में परमात्मा के विग्रह की सेवा पूजा करें। अनुभूति करें कि मैं परमात्मा का हूं और परमात्मा मेरे है। ईश्वर की प्रतिमाओं से तन्मयता से दर्शन वंदन करने से इह लौक व परलोक दोनों सुधर जाएंगे।

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Shiv Soni(SK)

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