बीकानेर : देशव्यापी“ खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भाकृअनुप–केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर के वैज्ञानिकों द्वारा बीकानेर जिले के एमजीएमजी गांवों गीगासर एवं सुजासर में सतत कृषि पद्धतियों तथा मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन को बढ़ावा देने हेतु एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. एस. के. माहेश्वरी, डॉ. एम. के. जाटव, डॉ. दीपक कुमार सरोलिया एवं डॉ. रामकेश मीना तथा प्रगतिशील किसानश्री मांगीलालके खेत पर किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों कोसंतुलित उर्वरक उपयोग, एकीकृत पादप पोषक तत्व प्रबंधन (IPNM), जैविक एवं प्राकृतिक खेती, मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल चक्र, हरी खादतथापीएसबी (PSB), वीएएम (VAM), ट्राइकोडर्मा एवं राइजोबैक्टीरिया जैसे लाभकारी सूक्ष्मजीवों के उपयोग के प्रति जागरूक करना था, जिससे मृदा उर्वरता एवं फसल उत्पादकता में वृद्धि की जा सके।
किसानों को संबोधित करते हुए डॉ. एस. के. माहेश्वरी ने बागवानी फसलों में पर्यावरण-अनुकूल रोग प्रबंधन उपायों पर प्रकाश डाला तथा रासायनिक कीटनाशकों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने खट्टे फलों (सिट्रस) में क्लीन प्लांट प्रोग्राम के महत्व की भी जानकारी दी। डॉ. एम. के. जाटव ने वैज्ञानिक अनुशंसाओं के आधार पर संतुलित उर्वरक प्रयोग के महत्व पर जोर दिया तथा प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले विभिन्न घोलों एवं तैयारियों के निर्माण एवं उपयोग का प्रदर्शन किया। डॉ. दीपक कुमार सरोलिया ने मृदा में पोषक तत्वों की स्थिति का आकलन करने तथा उर्वरकों के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए नियमित मृदा परीक्षण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि इससे कृषि लागत में कमी आती है तथा मृदा स्वास्थ्य में सुधार होता है।डॉ. रामकेश मीना ने जैविक एवं रासायनिक उर्वरकों के समन्वित उपयोग, फसल चक्र, सूक्ष्मजीवी समूहों (माइक्रोबियल कंसोर्टिया) तथा ढैंचा, मूंग एवं ग्वार जैसी हरी खाद फसलों के माध्यम से एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान प्रगतिशील किसान श्री मांगीलाल एवं अन्य किसानो ने वार्षिक फसलों में सतत पोषक तत्व प्रबंधन के अपने अनुभव साझा किए तथा किसानों को जैविक खादों, जैव उर्वरकों तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उन्नत मूलवृंतों (रूटस्टॉक) पर विकसित उन्नत किस्मों को अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे उत्पादकता, सहनशीलता एवं पर्यावरणीय स्थिरता में वृद्धि हो सके। कार्यक्रम में किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा पोषक तत्व प्रबंधन, प्राकृतिक खेती एवं गुणवत्तायुक्त बीज एवं रोपण सामग्री की उपलब्धता से संबंधित प्रश्न पूछे। वैज्ञानिकों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए सतत कृषि तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण, संसाधनों का कुशल उपयोग तथा राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता सुनिश्चित की जा सके।














