




नोखा। श्रावण मास के पावन अवसर पर नोखा के लाहोटी चौक स्थित अयोध्याधाम परिसर में आयोजित धार्मिक कथा एवं शिव (पार्थिव) पूजन कार्यक्रम में महाराज श्री ने श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कृति और शास्त्रों के महत्व का संदेश दिया। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और धर्मोपदेश का लाभ लिया।
महाराज श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि व्यक्ति को अपने जीवन में कभी भी अमर्यादित व्यवहार और आचरण नहीं करना चाहिए। भारतीय संस्कृति और ऋषि परंपरा की महानता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के ऋषियों के तप में ऐसी अद्भुत शक्ति रही है कि महर्षि विश्वामित्र ने अपने तपोबल से सूर्यवंशी राजा सत्यव्रत (त्रिशंकु) को सशरीर स्वर्ग भेज दिया। यह हमारी सनातन परंपरा की दिव्यता और शास्त्रों की महिमा का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि यदि जीवन का वास्तविक कल्याण चाहते हैं तो अपने मन या मत के अनुसार नहीं, बल्कि शास्त्रों के अनुसार जीवन का संचालन करें। किसी भी धार्मिक कार्य को विद्वान एवं शास्त्रनिष्ठ आचार्य के मार्गदर्शन में शास्त्रविहित विधि से करने पर ही उसका पूर्ण फल प्राप्त होता है।
कार्यक्रम के दौरान आचार्य हेमेंद्र शुक्ल एवं आचार्य पंकज शुक्ल ने प्रातःकालीन सत्र में भगवान शिव के पार्थिव पूजन एवं अर्चन का विधि-विधान से आयोजन कराया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।
महाराज श्री ने कहा कि जिन लोगों के जीवन में किसी भी प्रकार के कष्ट, बाधा या मनोकामना है, वे श्रावण मास में भगवान शिव का पार्थिव पूजन करें। शास्त्रों के अनुसार श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया यह पूजन समस्त कष्टों के निवारण, मनोकामनाओं की पूर्ति तथा सर्वकार्य सिद्धि प्रदान करने वाला माना गया है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि पार्थिव पूजन में भाग लेने के इच्छुक भक्त भारतीय वेशभूषा में नोखा के लाहोटी चौक स्थित अयोध्याधाम परिसर में पहुंचकर इस पुण्य अवसर का लाभ उठाएं और अपने जीवन को धर्ममय एवं मंगलमय बनाएं।














