बीकानेर। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित पवित्र श्री किन्नौर कैलाश महादेव की कठिन एवं रोमांचक तीर्थयात्रा पूरी कर बीकानेर के तीर्थयात्री शुक्रवार सुबह वापस पहुंचे। इस अवसर पर श्रद्धालुओं का तिरंगा झंडे, तिरंगा साफा, तिरंगा दुपट्टा और तिरंगे रंग की मिठाई खिलाकर भव्य स्वागत किया गया।
बीकानेर से स्वरूप सिंह, कैलाशी योगेश कुमार झा, हेमंत तंवर और दीपेश अग्रवाल तथा हिसार से भगवान सिंह जी किन्नौर कैलाश महादेव की यात्रा पर रवाना हुए थे। किन्नौर कैलाश यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था है। कहा जाता है कि “सारे कैलाश बार-बार, किन्नौर कैलाश एक बार।” कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और दुर्गम पहाड़ी मार्ग के कारण इस यात्रा को देश की कठिनतम तीर्थ यात्राओं में गिना जाता है।
यात्रियों ने बीकानेर से प्रस्थान करने के बाद अंबाला कैंट होते हुए हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के तांगलिंग (Tangling) गांव तक का सफर तय किया। यात्रा से पूर्व सभी यात्रियों ने निर्धारित ऑनलाइन पंजीयन एवं मेडिकल प्रक्रिया पूरी की। तांगलिंग गांव पहुंचने के बाद सरकार की ओर से बनाए गए टोकन काउंटर से यात्रा के लिए टोकन प्राप्त किया गया। इसके बाद यात्रियों ने निर्धारित ग्रीन टैक्स जमा करवाया।
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यात्रा के दौरान अपने साथ ले जाए जाने वाले पॉलिथीन एवं प्लास्टिक आइटम के अनुसार यात्रियों से रिफंडेबल सिक्योरिटी राशि भी जमा करवाई गई। इसका उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्र में प्लास्टिक एवं अन्य कचरा फैलने से रोकना तथा किन्नौर कैलाश यात्रा मार्ग को स्वच्छ एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाए रखना है।
टोकन एवं अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद यात्रियों ने पैदल यात्रा प्रारंभ की। करीब 9 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई पूरी करने के बाद यात्री गणेश पार्क पहुंचे। यहां रात्रि विश्राम के बाद रात करीब 12 बजे आगे की यात्रा शुरू की गई।
गणेश पार्क से आगे करीब 8 किलोमीटर का दुर्गम पैदल मार्ग तय करना था। इस दौरान लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर गणेश गुफा आती है। इसके बाद करीब 2 किलोमीटर आगे पार्वती कुंड स्थित है। पार्वती कुंड से लगभग 2 किलोमीटर आगे पहुंचने पर यात्रियों को श्री किन्नौर कैलाश महादेव के पवित्र एवं साक्षात दर्शन हुए। कठिन चढ़ाई, ठंड, पानी की कमी और दुर्गम पहाड़ी रास्ते के बावजूद श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और आस्था के साथ यात्रा पूरी की।
महादेव के दर्शन करने के बाद यात्री पुनः उसी मार्ग से गणेश पार्क पहुंचे। अगले दिन गणेश पार्क से वापस तांगलिंग गांव पहुंचकर यात्रा की औपचारिकताएं पूरी की गईं और वहां से बीकानेर के लिए प्रस्थान किया।
बीकानेर पहुंचने पर आज सुबह तीर्थयात्रियों का श्रद्धालुओं एवं शुभचिंतकों द्वारा देशभक्ति और धार्मिक उत्साह के साथ स्वागत किया गया। इस दौरान यात्रियों को तिरंगा झंडा, तिरंगा साफा और तिरंगा दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया गया तथा तिरंगे रंग की मिठाई खिलाकर यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने पर शुभकामनाएं दी गईं।
स्वागत कार्यक्रम में डॉ. रामदेव अग्रवाल, विजय कुमार अग्रवाल, प्रशांत अग्रवाल, ओम प्रकाश पुरी एवं दिनेश गुप्ता सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने यात्रियों के सुरक्षित लौटने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके सफल तीर्थ दर्शन के लिए बधाई दी।
श्रद्धालुओं ने बताया कि किन्नौर कैलाश यात्रा केवल धार्मिक आस्था की यात्रा नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और कठिन परिस्थितियों के बीच आत्मविश्वास एवं धैर्य की भी परीक्षा है। यात्रा के दौरान पर्यावरण संरक्षण के लिए अपनाए गए नियमों और प्लास्टिक पर नियंत्रण की व्यवस्था को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।














