नौखा। ज्ञानशाला द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बच्चों ने विविध विषयों पर भावपूर्ण एवं मनमोहक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। कार्यक्रम में *प्रवक्ता उपासिका श्रीमती प्रतिभा चोपड़ा* ने कहा कि बच्चों में सत्संस्कारों के विकास के लिए ज्ञानशाला अत्यंत आवश्यक है। अभिभावकों को जागरूक होकर बच्चों को नियमित रूप से ज्ञानशाला भेजना चाहिए, ताकि उनमें नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास हो सके। सत्य, अहिंसा, सेवा, विनम्रता और अनुशासन उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बनें।
*प्रवक्ता उपासिका श्रीमती पारस बाई बड़ौला* ने नमस्कार महामंत्र की महिमा, 24 तीर्थंकरों के मंगलपाठ तथा माता-पिता के प्रति विनम्र एवं सहनशील बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने नोखा की ज्ञानशाला की गतिविधियों की सराहना करते हुए बच्चों एवं प्रशिक्षकों को शुभकामनाएं दीं।
महिला मंडल एवं प्रशिक्षण टीम द्वारा मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। श्रीमती राजकुमारी मरोठी एवं श्रीमती रेखा सेठिया ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए बच्चों को ज्ञानशाला की गतिविधियों में निरंतर उत्साहपूर्वक भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
कवि एवं प्रेसक इंद्रचंद बेद ने कहा कि ज्ञानशाला के बच्चों की प्रस्तुतियां अत्यंत भावपूर्ण और मनमोहक रहीं। नमस्कार महामंत्र का महत्व, पच्चीस बोल कंठस्थ करने की प्रेरणा, वैराग्य भावना तथा नशामुक्त जीवन जैसे विषयों पर बच्चों ने सुंदर प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों ने धर्म, संस्कार और नैतिक जीवन के महत्व को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर तपस्वी *करण भुरा* की नौ दिन की तपस्या तथा *पूर्वा मरोठी* की पांच दिन की तपस्या भी जारी है। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।















