
बीकानेर, 21 अगस्त। शिवबाड़ी के गंगेश्वर पार्श्वनाथ जिनालय में श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट के तत्वावधान में सकलश्री संघ के सहयोग से शनिवार को सुबह दस बजे परमात्मा की पूजा, दोपहर सवा बारह बजे की सवारी (वरघोड़ा) व उसके बाद स्वधर्मी भक्ति का आयोजन होगा।
साध्वीश्री सुरंजनाश्रीजी म.सा. की शिष्या साध्वी मुक्तांजनाश्रीजी, सुरक्षाजनाश्री, सौम्यजनांश्री, चिलेहांजनाश्री व चितक्खरांजनाश्री के सान्निध्य में परमात्मा की सवारी मंदिर से निकल कर शिवबाड़ी के प्राचीन तालाब तक जाएगी। तालाब के पास स्नात्र पूजा होगी। वापस आते वक्त शिवबाडी के लालेश्वर महादेव मंदिर के अधिष्ठाता स्वामी विमर्शानंद गिरि की ओर से प्राचीन परम्परानुसार भगवान गंगेश्वर पार्श्वनाथ का वंदन करते हुए भेंट चढाई जाएगी।
भगवान श्री गंगेश्वर पार्श्वनाथ जीर्णोंद्धार जिन मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष हस्तीमल सेठी ने बताया कि 150 वर्ष प्राचीन 45 फीट ऊंचे शिखर का यह मंदिर सफेद संगमरमर से बना है। मंदिर का जीर्णोंद्धार विचक्षण ज्योति, महामांगलिक प्रदात्री साध्वी चन्द्र प्रभा की प्रेरणा से 2013 में शुरू हुआ श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट के तत्वावधान में सकल जैन संघ के सहयोग से शुरू हुआ जो तथा वर्तमान में भी जारी है।
सेठी ने बताया कि मंदिर में प्रवेश करते ही दो हाथी शोभायमान है। मंदिर के रंग मंडप भगवान आदिनाथ, महावीर स्वामीजी और नोकाड़ा पार्श्वनाथ, शंखेश्वर पार्श्वनाथ, गौतम स्वामीजी, मणिधारी दादा गुरुदेव, नाकोड़ा भैरव और पार्श्व पदमावती की प्रतिमाएं है। निज मंदिर में भगवान गंगेश्वर पार्श्वनाथ,आदिनाथ व भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमाएं है। गंगेश्वर पार्श्वनाथ की प्रतिमा है जो डेढ़ वर्ष प्राचीन है। मंदिर के चारों और भगवान पार्श्वनाथ की 108 प्रतिमाएं, नागफण के नीचे है। ऐसा दूसरा जैन मंदिर हिन्दुस्तान में कहीं नहीं है। वर्तमान में मंदिर में इले (रंग बिरंगे पत्थर का कार्य) हो रहा है। जीर्णोंद्धार के बाद इस मंदिर की पुर्नःप्रतिष्ठा जून 2024 हुई थी। पूरा मंदिर सफेद संगमरमर बना है।
—————————














