बीकानेर, 21 अगस्त। अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के हुक्म संघ के नवम पट्टधर आचार्य प्रवर 1008 रामलालजी म.सा.,व उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि के चातुर्मास (समर्पण महोत्सव-2026 ) के तहत छबीली घाटी के सेवा सदन में चल रही श्राविकाओं की विशेष कार्यशाला ’’अब नही ंतो फिर कब’’ में शुक्रवार को मधुर मुनि ने कहा कि जल का सदुपयोग करें तथा साधु-साध्वियों को उबालकर ठंडा किया हुआ शुद्ध जल को बहराए (पक्का पानी गोचरी में दे)।
साधुमार्गी महिला मंडल अध्यक्ष बांठिया ने बताया कि मुनिश्री ने बताया कि जैन साधु-साध्वी, व अनेक श्रावक-श्राविकाएं ललिता उबाल कर ठंडा किया हुआ पर्याप्त और शुद्ध (पक्का/साफ) पानी का उपयोग करते है। धार्मिक व वैज्ञानिक दृष्टि से पक्का पानी का उपयोग स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद रहता है। पक्का पानी पीने से शरीर स्वस्थ व पाचन क्रिया सही रहती है। पक्का पानी भोजन को पचाने और पोषक तत्वों को सोखने में मदद करता है, पर्याप्त पानी पानी से त्वचा में नही रहती है वह स्वस्थ व चमकदार रहती है। शरीर के विषाक्त पदार्थ हानिकारक टॉक्सिन बाहर निकल जाते है। शरीर का तापमान निमंत्रित रहता है, थकान महसूस नहीं होती व्यक्ति का वनज भी नियंत्रित रहता है।
पक्का पानी उबालने, रखने और साधु-साध्वियों को गोचरी के रूप में देने पर सुचिता व सचेष्टता रखनी चाहिए। वर्षात में पक्का पानी तीन दिन, सर्दी में चार दिन व गर्मी में पांच दिन सही रहता है, उसके बाद उसके दूषित होने की संभावना रहती है। मुनिश्री ने बताया कि भगवान की कथा, मनुष्य की व्यथा, जैन साधु साध्वियों के जीवन आदर्श, उनको भीक्षा में दिए जाने वाले गोचरी पानी की चर्चा भी वृहद है।














