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हनुमानजी ने वाल्मिकी रामायण कथा के 36 वें दिन बुधवार को लंका को नष्ट कर दिया

नोखा। यहाँ लोहटी चौक अयोध्या धाम में चातुर्मास सत्संग समिति नोखा की ओर से 29 जुलाई से आयोजित हो रही श्री वाल्मिकी रामायण के 36 वें दिन कथा व्यास परम पूज्य दण्डी स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज (वृंदावन) ने सुन्दर कांड की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि सुन्दर कांड में कष्ट ही कष्ट है फिर कैसे सुंदर कांड है इस बताया कि सुन्दर कांड रामभक्त पवन पुत्र हनुमान के लक्ष्य की सिद्धि करवाने के कारण सुंदर कांड है। सुन्दर कांड के माध्यम से हनुमान का लक्ष्य सिद्ध हो गया और खोजते – खोजते माँ सिता का दर्शन हो जाते है इस कारण सुंदर कांड है। महाराज श्री ने कहा कि सुन्दर कांड के पाठ करवाने से बड़े से बड़े कष्ट टल जाते हैं। और मनोकामना सिद्ध होती है। महाराज ने कहा हनुमान ने भगवान राम से कुछ नहीं मांगा। और कहने पर भी मना कर दिया। लेकिन भगवान राम ने उन्हें अपना स्वरूप दिया और गले लगा लिया। लंका में हनुमान ने माँ सीता से कहते हैं माँ आप रोवो मत भगवान राम जल्द ही आयेंगे और रावण को मार कर आपको ले जायेंगे। हनुमान जी माँ सीता से कहते हैं कि मैं अब जाऊँ तो सीता उदास हो जाती है कहती हैं कि एक दिन और रुक जाओ तब हनुमान जी कहते हैं कि मेरा वहाँ बेसब्री से इन्ताजार हो रहा है तब माँ सीता कहती हैं कि जाओ और राम जी को संदेश दो। तो हनुमान जी माँ सीता से कोई निशानी माँगने पर माँ सीता ने अपनी चुड़ामणी निकाल कर दी। हनुमान ने अन्य निशानी माँगे जाने पर माँ सीता ने दो बाते बताते हुए कहा यह मेरे और रामजी के बीच की है। फिर हनुमान जी ने लंका की अशोक वाटिका उजाड़कर नष्ट कर दिया 80 हजार राक्षसों और रावण के मंत्री के 7 पुत्रों और 5 योद्धाओं व रावण के पुत्र अक्षय कुमार आदि को रावण ने भेजा लेकिन हनुमान जी ने सबको मार दिया। महाराज श्री की कथा से पूर्व कोटा से पधारे रामायण, भागवत के मर्मज्ञ आचार्य संत राजेश जी महाराज ने भी प्रवचन देते हुए कहा कि व्यास पीठ पर विराजित मेरे दादा गुरु सहित जितने भी दण्डी स्वामी यहाँ बैठे हैं इनके दर्शन मात्र से भगवान के दर्शन हो जाते हैं हम संत समाज द्वारा सनातन धर्म, शास्त्रों की रक्षा करना है। संत जी के धारावाहिक ओजस्वी प्रवचन सुनकर व्यास पीठ पर विराजित ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज मुस्कुरा रहे थे। इन्द्रचन्द मोदी ने प्रेस नोट जारी कर उक्त जानकारी दी। सिमिति के दामोदर तिवाड़ी, प्रहलाद मोहता, गिरधारी पारीक, गोपाल मोहता, जुगल लोहिया, नारायण राठी, रमेश मालानी, बाबूलाल चांडक, पवन चांडक व्यवस्था संभाले हुवे है।
4 सितंबर को जन्मास्टमी पर्व मनाया जाएगा।

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Gordhan Soni

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