बीकानेर के चुनावी घमासान के बीच बड़ी ख़बर सामने आ रही है। कांग्रेसी पार्षद पूर्व सभापति मकसूद अहमद, पार्षद नवरतन डागा व मदन मेघवाल की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट की रोक लग चुकी है। मकसूद अहमद को कोटगेट पुलिस ने एक पुराने मामले में पेश होने का नोटिस दिया था। इसमें मकसूद गवाह थे। आशंका थी कि कोटगेट पुलिस उन्हें गिरफ्तार करेगी। हालांकि उन्होंने जवाब पेश कर दिया। मकसूद की ओर से हाईकोर्ट में याचिका एडवोकेट सचिन आचार्य के सहायक एडवोकेट कौशल गौतम व एडवोकेट भव्य गौतम ने पेश की। एडवोकेट कौशल गौतम ने रविवार शाम हुई विशेष सुनवाई में जस्टिस सुनील बेनीवाल की एकल पीठ के समक्ष मामले से संबंधित तथ्य रखे। एकलपीठ ने मकसूद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। बता दें कि रविवार शाम हाईकोर्ट विशेष तौर पर इसी मामले के लिए खोली गई।वहीं इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल व कांग्रेसी पार्षद नवरतन डागा पर हुए सिंबल चोरी के मुकदमें में भी हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। इस मामले की पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट कुलदीप शर्मा ने बताया कि सिंबल चोरी के मामले में डागा व मेघवाल की गिरफ्तारी पर रोक पहले ही लग चुकी थी। बता दें कि नवरतन डागा को रविवार को सदर पुलिस ने दो नोटिस दिए। एक नोटिस घर पर चिपकाया, कहा कि 20 सितंबर की शाम सात बजे सदर थाने में उपस्थित हों। दूसरा नोटिस वाट्सएप किया, इसमें 21 सितंबर की सुबह 10 बजे सदर थाने में उपस्थित होने को कहा गया।उल्लेखनीय है कि बीकानेर में जनता ने कांग्रेस को 80 में से 42 सीटों पर बहुमत दिया। जबकि बीजेपी के पास 27 सीटें ही हैं। ऐसे में कांग्रेस बहुमत पर है। मगर बीजेपी लगातार नगर निगम में बोर्ड बनाने की जद्दोजहद कर रही है। इसी बीच पिछले चार पांच दिनों में प्रशासन व पुलिस ने विभिन्न तरह से कांग्रेसी पार्षदों व उनके समर्थकों को नोटिस दिए। कहीं गिरफ्तारी के प्रयास भी हुए। ऐसे में पुलिस व प्रशासन पर राजनीतिक संलिप्तता के आरोप भी लग रहे हैं।आरोप है कि सत्ता के इशारे पर पुलिस मकसूद व नवरत्न डागा को गिरफ्तार कर वोटिंग करने से रोकना चाहती है। कुछ निर्दलीय भी निशाने पर है। अब देखना यह है कि हाईकोर्ट के आदेशों की पालना होती है या धज्जियां उड़ाई जाती है। बता दें कि सोमवार सुबह दस बजे से महापौर के मतदान शुरू होगा। 80 पार्षद मतदान करेंगे।












