*!!भिक्षु चरमहोत्सव के सूत्रधार श्री तुलसी!!*
1092
( *!!”मानवता के मसीहा” आचार्य भिक्षु की मर्यादाएं और अवदान आज भी भौतिकवाद की चकाचौंध में प्रासंगिक हैं!!* )
आलेख…………………. मोहन भन्साली
*महावीर की राह पर संत श्री भिक्षु*
पंचम आरे के विषम दौर में *भगवान महावीर की राह* पर अग्रसित हुए दीपा नन्दन! ऐसी राह पर जहां न खाने का पूरा आहार था। न पीने का प्रयाप्त पानी था। न ही रहने को उपयुक्त स्थान मिलता था। किन्तु सत्य की साधना में अटल और अडिग मनोबल के धनी *संत श्री भिक्षु* ने आरोहण किया।
*साधना का शिखर पुरुष*
अंतिम पड़ाव स्थल पर संत श्री भिक्षु ने पहला प्रवास किया। जहां पर अर्धरात्रि में वहां के यक्ष देव प्रकट होकर निश्चितता से यहां पर विराजने का निवेदन किया और साधना के शिखर पुरुष का श्रृद्धानत बन गया।
*नवमें पट्टधर श्री तुलसी का अवतरण*
धर्म क्रान्तिकारी आर्य भिक्षु की आध्यात्मिक विचारधारा को प्रवाहित करने के लिए मारवाड़ के छोटे से गांव लाडनूं में श्री झूमरमल जी खट्टेड के घर में वि. स.1971 कार्तिक शुक्ला 2 दिनांक20.10.1914 को तुलसी का अवतरण हुआ।
11 वर्षीय वन्दना नन्दन को वि. स.1982 पौष कृष्णा 5 को तेरापंथ धर्मसंघ के अष्टमाचार्य श्री कालूगणी ने *”संयम रत्न”* प्रदान किया। गंगापुर में मात्र 22 वर्ष के युवा मुनिश्री तुलसी को तेरापंथ का *नवमां पट्टधर* बना दिया।
*शिक्षक और अद्वितीय अध्ययन कला*
आपने अपनी अद्वितीय अध्ययन कला से बिंदु को सिंधु और लघु को महान् बना दिया। अनेक महान् विभूतियों का निर्माण किया। 21वीं सदी के महान् दार्शनिक महाप्रज्ञ जी और महाश्रमण जी का जीवन निर्माण *मानवता के लिए वरदान* साबित हुआ।
*अणुव्रत आंदोलन का शंखनाद*
आचार्य श्री तुलसी का बाहृय व्यक्तित्व मनमोहक था! ढूंढ ढुढाला, नाटा कद, गौर वर्ण, कानों में बालों की अद्भुत छटाएं, अमृत बरसाती आंखें, ओजस्वी माधुर्य वाणी, चांदनी सी शीतलता और सुर्य सा तेज आभामंडल सबको सम्मोहित करता था! तो वहीं आपकी अंतरात्मा, अंतर्चेतना नैतिकता की पुनः प्रतिष्ठा के लिए व्याकुल हो उठी थी। आपके इस दूरगामी सोच का परिणाम है कि आजाद भारत की आधारशिला में नैतिकता की प्राण प्रतिष्ठा हेतु और जन-जन के कल्याण के लिए आपने *अणुव्रत आंदोलन का शंखनाद किया।*
*संसदीय सभागार में अणुव्रत की गूंज*
भिक्षु के कदमताल पर मानवता को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में संयम का मार्गदर्शन देने के उद्देश्य से आपने पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक हजारों किलोमीटर की पदयात्राएं की। पदयात्राओं में आपने गांव-गांव, शहर-शहर, ढाणी-ढाणी होते हुए *संसदीय सभागार* में भारतीय कर्णधारों को अणुव्रत का पाठ पढ़ाया। इंसान को इंसानियत का पथदर्शन दिया। जन-जन की बुराईयों को भिक्षा के रूप में ग्रहण करके लाखों परिवारों को व्यसन मुक्त किया।
*संकल्प सिद्धी की अटल साधना*
आचार्य श्री भिक्षु की संकल्प सिद्धी की अटल साधना से जन-मानस को लाभान्वित किया। आदर्श जीवन जीने की कला सिखाई। दिल्ली के चांदनी चौक में मौन रैली का आयोजन किया। मानवीय मूल्यों के उत्थान में अणुव्रत के सिद्धांतों से बौद्धिक व प्रबुद्ध वर्ग, चिंतनशील व देश विदेश का मीडियाकर्मी प्रभावित हुआ।
*सर्व धर्म समभाव एवं अस्पृश्यता निवारण*
आप तेरापंथ संप्रदाय के आचार्य होते हुए भी जाति, धर्म व सम्प्रदाय से ऊपर उठकर मानव मात्र के लिए सभी धर्मावलंबी गुरुओं से मिले। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और गिरजाघर पधारे। सर्व धर्म समभाव के प्रति जन-मानस को जागृत किया। अणुव्रत के छोटे-छोटे संकल्पों को सुख समृद्धि का सेतु बताया। आपका जीवनोपयोगी संदेश *अस्पृश्यता निवारण* में सार्थक बना।
*समाज सुधारक::नया मोड़ का अवदान*
भिक्षु के कदमताल पर समाज उत्थान में परंपरागत रूप से प्रचलित कुरुढ़ियों पर कुठाराघात किया। बैड़ियों में जकड़ी नारी को जागृत कर *नया मोड़* का अवदान दिया। कन्याओं को शिक्षा के प्रति आकर्षित कर बदलते परिवेश में खुलें आसमां में उड़ने का गगनचुंबी पंख लगा दिया।
*आगम संपादन::साहित्य और प्राणवान गीत*
साहित्य सम्राट ने प्राकृत भाषा में उपलब्ध जैन आगमों को युगानुकुल सहज व सरल हिन्दी भाषा में संपादित किया। हिन्दी, संस्कृत, प्राकृत और राजस्थानी आदि भाषाओं में साहित्य जगत को साहित्य का भण्डारण दिया। संगीत के जादूगर कालजयी श्री तुलसी ने प्राणवान संगीत की पवित्र धारा में गीत ग्रंथमालाएं, कविताऐं और आलेख के माध्यम से श्रृद्धालुओं में अकल्पनीय शक्ति का संचार किया।
*आचार्य श्री भिक्षु द्वारा धर्म की महत्ता*
आचार्य श्री भिक्षु ने धर्म की महत्ता को परिभाषित करते हुए त्याग और भोग में धर्म और अधर्म की भ्रांतियों को दूर करके मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूक किया। आपने आर्य भिक्षु की सिद्धांतिक विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए महामहिम राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, न्यायाधीश, प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी, राजनेता, अभिनेता, धार्मिक व सामाजिक संगठन, कार्यकर्ता, उद्योगपति और व्यापारी आदि को *ज्वलंत समस्याओं के समाधान में अनेकांत दर्शन, सकारात्मक चिंतन और संयमित जीवन-शैली का आलोकित प्रकाशपुंज दिया।* प्रामाणिकता का संदेश दिया। नशामुक्त जीवन व्यापन करने का संकल्प दिया। स्वस्थ समाज निर्माण में अणुव्रत, प्रेक्षाध्यान, जीवन विज्ञान और विसर्जन आदि अवदानों से मानवता को उपकृत किया।
*धधकते अंगारों पर अहिंसा का झरना*
एक समय था। पंजाब जल रहा था। चहुंओर त्राहिमाम से प्रकंपित था। हृदय विदारक माहौल में करुणानिधि राष्ट्र संत श्री तुलसी ने संत शिरोमणी श्री लोंगेवाला और तत्कालीन प्रधानमंत्री माननीय श्री राजीव गांधी के बीच *शांति का समझौता* कराकर धधकते हुए अंगारों पर अहिंसा का झरना बरसा दिया।
*अलंकरण हुआ गौरवान्वित*
भिक्षु बगीया के बागवान के नाम से युगप्रधान, भारत ज्योति, वाक्पति डी-लिट, हकीम खां सूर सम्मान और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार जैसे अनेकानेक अलंकरण और सम्मान स्वयं आपसे गौरवान्वित हो गया। सौभाग्य से अलंकरण प्रदाता संस्थाएं भी स्वयं आपकी विद्वता से गौरव की अनुभूति की।
*चमत्कारी तीर्थ धाम*
भिक्षु के कदमताल पर मानवता को सिरियारी में लुप्त समाधि का पुनरुत्थान कर आचार्य श्री भिक्षु की समाधि स्थल का *चमत्कारी तीर्थ धाम* दिया। जैन विश्व भारती, लाडनूं को तेरापंथ की राजधानी बना दिया। यह प्रांगण कामधेनु के नाम से विश्व विख्यात है। स्कूल, कोलेज, योग साधना केन्द्र, आयुर्वेद चिकित्सा, सचिवालय, ग्रंथागार, चित्र दीर्घा आदि से सुसज्जित हरा-भरा परिसर रमणीक और शुद्ध पर्यावरण के सरंक्षण में स्वस्थ स्वास्थ्य वर्धक के लिए यह बहुपयोगी रमणीय स्थल है। आज धार्मिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक सरोकार में निर्मित यह तपोवन सत्य अहिंसा की साधना के लिए आध्यात्मिक संपोषण का अनुकूल साध्य बन गया है।
*आमूलचूल परिवर्तन और संस्कार निर्माण*
भौतिकवाद की चकाचौंध में भगवान महावीर की अमृत वाणी और आचार्य श्री भिक्षु की श्रृद्धा, सेवा और समर्पण के संस्कारों से जनजीवन को लाभान्वित करने के उद्देश्य से आपने धवल सेना के बीच *समण श्रेणी* का उद्भव कर सात समंदर पार संस्कार निर्माण का स्वप्न साकार किया। वैरागी मुमुक्षुओं के पोषण में नवाचार दिया। आध्यात्मिक वातावरण के वर्धापना में उपासक और जैन संस्कारक का निर्माण किया। वृद्ध सेवा केन्द्र पर विशेष बल दिया। संघीय सारणा वारणा में अनेक संस्थाओं का सुत्रपात किया। ज्ञानशाला के बच्चों और ऊर्जावान युवाशक्ति में संस्कारों का बीजारोपण किया। सेवाभावी साधु साध्वियां, श्रावक-श्राविकाएं और सभा संस्थाओं को अलंकरण व संबोधन से अलंकृत किया। भैक्षव शासन की संघीय व्यवस्थाओं में आमूलचूल परिवर्तन करके युगानुकुल व्यवस्थाएं प्रदान की।
*असाधारण महोत्सव*
भिक्षु के कदमताल पर आपने जीवन्त पर्यन्त अनवरत विरोध को विनोद मानकर कलात्मक, रचनात्मक एवं सृजनात्मक कार्यों को संपादित कर संघीय संपदाओं में अद्वितीय विकास किया।उत्सव को महोत्सव के रुप मे आपने महामना आचार्य श्री भिक्षु की स्मृति में भाद्रपद शुक्ला त्रयोदशी को *भिक्षु चरमहोत्सव* का सूत्रपात किया। तेरापंथ के आर्धप्रवर्तक द्वारा उल्लेखित *मर्यादा पत्र* को आपने तेरापंथ में प्राण का संचार मानते हुए माघ शुक्ला पंचमी को *मर्यादा महोत्सव* के रूप में असाधारण महोत्सव को श्रृद्धा का आधार बना दिया।
*अविस्मरणीय इतिहास और पद विसर्जन*
*”अहं से अर्हं की साधना में लीन साधक” आर्य भिक्षु के अनुयाई श्री तुलसी ने पदलोलुपता के दौर में वि. स. 2051 माघ शुक्ला 6 दिनांक 05.02.1995 को दिल्ली में *आचार्य पद का विसर्जन कर “प्रज्ञावान महाप्रज्ञ जी का आचार्य पदाभिषेक” करके* समाज और राष्ट्र में प्रेरणादायक संदेश का अविस्मरणीय इतिहास स्वर्णाक्षरों में अंकित किया।
*मानवता के मसीहा की मर्यादाएं और अवदान*
अदृश्य शक्ति के अधिदेवता ने चरैवेति चरैवेति मंत्र को आत्मसात करने वाले अदम्य साहसिक विकास पुरुष के जीवन चरित्र से हम और आप अनेक रुपों में रूबरू हुए हैं। किन्तु उन अकल्पनीय पलों को चंद शब्दो में समावेश करना असम्भव है। सचमुच! अपनी अनुकम्पा से, हर मुश्किल घड़ी में जन-जन की नैया को पार करने वाले और प्रत्येक वर्ग क्षेत्र के आगंतुकों को कुछ न कुछ देने वाले “मानवता के मसीहा” आर्य भिक्षु की मर्यादाएं और अवदान आज भी भौतिकवाद की चकाचौंध में प्रासंगिक हैं।
*224वें भिक्षु चरमहोत्सव*
भिक्षु के कदमताल पर श्री तुलसी ने विश्व व्यापी सत्य और अहिंसा के राजमार्ग का निर्माण किया। वर्तमान में भैक्षव शासन के अनुशास्ता युगप्रधान महातपस्वी महाश्रमण जी की प्रेरणादाई उपदेशनाओं से *224वें भिक्षु चरमहोत्सव* पर आर्य भिक्षु की आत्म कल्याणकारी साधना से जन-जन लाभान्वित हो रहा हैं।
::गुरु चरणों में सादर समर्पित::
रचनाकार:: मो: 7734968551
मोहनलाल भन्साली “कलाकार”
गंगाशहर, बीकानेर! राजस्थान
दिनांक:: 22.09.2026















