



बीकानेर, 2 अक्टूबर। संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा ने कहा कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक या अन्य तरह के शोषण से बचाने के लिए अभिभावक, शिक्षक व चिकित्सक सजग रहे तथा सावधानी रखें। बच्चों को मोबाइल व अप्रिय घटनाओं से दूर रखें तथा उन्हें प्रेम, दुलार से बुरे साथियों से दूर रखे । बच्चों को रचनात्मक व सृजनात्मक गतिविधियों से जोड़े तथा समाज में व्याप्त बुराइयों से दूर रहने के लिए ें स्नेह व आत्मीयता से समझाएं।
संभागीय आयुक्त मीणा शुक्रवार को सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध शिशु औषध विभाग के सेमिनार कक्ष में सेंट्रल एडोलसेंट हैल्थ एकेडमी के तत्वावधान में ’’पोक्सो कानून व चिकित्सक के दायित्व विषयक कार्याशाला में मुख्य अतिथि के रूप् में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आम जन के जागरूक होने से ही अनेक तरह के अपराधों, विशेषकर बालिकाओं के शोषण, उत्पीड़न के अपराध में विराम लग सकता है।
मुख्य वक्ता चूरू के वरिष्ठ अधिवक्ता वरुण सेनी ने कहा कि पॉक्सो एक्ट 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन शोषण, उत्पीड़न व अश्लील सामग्री से सुरक्षा देने वाला विशेष कानून है जो 14 नवम्बर 2012 को लागू हुआ था। इस कानून के तहत 18 वर्ष से कम आयु के हर बालक-बालिका को बच्चों की श्रेणी में माना है। इस कानून में अपराध की गंभीरता के आधार पर न्यूनतम 3 वर्ष से लेकर उम्र कैद या मृत्यु दंड तक की सजा का प्रावधान हे। इस कानून के तहत दर्ज मामले गैर जमानती होते है और पुलिस बिना वारंट के अपराधी को गिरफतार कर सकती है। पॉक्सों एक्ट के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों में एक साल के भीतर सुनवाई पूरी करने का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि पॉक्सो एक्ट यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण देने का विशेष कानून है। इसका उद्धेश्य 18 से कम उम्र के बच्चों (लड़के-लड़कियों ) यौन शोषण, उत्पीड़न और
पोर्नोग्राफी जैसे अपराधों से बचाना है। पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धारों का विस्तार से वर्णन किया तथा चिकित्सकों के सवालों का जवाब दिया।
अधिवक्ता सैनी ने कहा कि पॉक्सो एक्ट में चिकित्सा परीक्षण व चिकित्सक की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। चिकित्सक पूर्ण सावधानी के साथ पीड़ित बालक-बालिका का परीक्षण करें तथा पुलिस को समय पर इसके बारे में सूचित करें।बच्चे की पहचान एवं चिकित्सा रिपोर्ट गोपनीय रखे तथा चिकित्सकीय परीक्षण घटना या शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर करें। पीड़ित बालक-बालिकाओं का चिकित्सकीय परीक्षण उनके अभिभावक की साक्षी में करें। बालिका का विशेषकर महिला चिकित्सक ही जांच करें। किसी यौन अपराध से पीड़ित बालिका के अस्पताल पहुंचने पर उसका तत्काल इलाज करें तथा अपने अधिकारी व संबंधित पुलिस थाना को सूचित करें। अपराध के साक्ष्यों को सही तरीके से पुलिस की ओर से प्रदत निर्धारित प्रपत्र में तटस्थता से सही जानकारी दें। पुलिस में एफ.आई.आर दर्ज होने से पूर्व ही चिकित्सक पीड़ित का इलाज करें तथा नमूनों का संग्रहण करें। उन्होंने कहा कि कहीं 18 वर्ष से कम आयु के बालक बालिका के साथ अपराध होता दिखाई दे तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। अपराध के दिखाई देने पर पुलिस को सूचना नहीं देना धारा 21 के तहत अपराध का दोषी माना जाता है। पीड़ित के साथ चिकित्सक दोस्ताना, व्यवहार रखे तथा उसे घटना की पूछताछ कर मेडिकल परीक्षण करें तथा सैम्पल को संग्रहित करें। सैम्पलों का डाक्यूमेंटशन प्रोपर तरीके से करें। उनके साथ उनके सहयोगी एडवोकेट दिलीप कुमार ने भी चिकित्सकों की पॉक्सो एक्ट के कानून के संबंध में बातचीत की।
शिशु औषध विभाग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जी.एस.तंवर ने कहा कि इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की विशेष शाखा एडोलसेंट हैल्थ एकेडमी (किशोर स्वाथ्य अकादमी) बीकानेर किशोर छात्र-छात्राओं की शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए शैक्षणिक, सामाजिक एवं चिकित्सकीय संस्थाओं में अभियान के रूप में कार्य कर रही है। इस सेमिनार से चिकित्सकों को पॉक्सो एक्ट की नई जानकारियां मिली है जो इनके जीवन में काफी उपयोगी रहेगी।
एडोलसेंट हेल्थ एकेडमी के सचिव डॉ गौरव पारीक ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया ।
एडोलसेंट हैल्थ एकेडमी (किशोर स्वाथ्य अकादमी) बीकानेर के चैप्टर की चैयर पर्सन तथा बाल एवं शिशु रोग विभाग की आचार्य डॉ.सारिका स्वामी ने आयोजन के महत्व को उजागर करते हुए कहा कि बालिका की जांच महिला चिकित्सक ही करें, पीड़ित बालिका के साथ कोई महिला अभिभावक नहीं होने पर अपने विभागाध्यक्ष से महिला कार्मिक को साथ लें। रक्त आदि का सैम्पल फैटा र्काड में न्यूनतम लें। जांच के समय चिकित्सक जज के भाव नहीं रखे। चिकित्सक किसी पार्टी का हिस्सा नहीं बनें, टीनेज प्रैग्नेंसी के केस में फीटस का सैंपल सलाइन में ही सेव करें,आदि के बारे में बताया तथा कार्यशाला में शामिल विभिन्न निजी एवं सरकारी अस्पतालों के बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक की बीकानेर शाखा की अध्यक्ष डॉ.रेणु अग्रवाल, सचिव व बाल एवं शिशु औषध विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.जी.एस.तंवर, डॉ.श्याम अग्रवाल, डॉ.गौरव गोम्बर, डॉ.ओपी चाहर, डॉ.पवन डारा,डॉ.कुलदीप बिट्ठू, डॉ. मुकेश बेनीवाल, डॉ.खुर्शीदा, डॉ.सूर्य लता कुकणा, डॉ.संतोष चांडक, हिमांशु गुप्ता, डॉ.धीरज शर्मा, अनुभव चौधरी सहित अस्पताल के रेजीडेंट, सीनियर रेजीडेंट, सह आचार्य, मेडिकल ज्यूरिस्ट व महिला चिकित्सक ने संभागीय आयुक्त व अधिवक्ता का अभिनंदन किया।













