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महाराजा गंगासिंह जी के सिक्कों में झलकती है बीकानेर की शाही विरासत


जयंती विशेष: गंगाशाही रुपया, सोने की मोहर और तांबे के सिक्के आज भी मुद्राशास्त्रियों व संग्रहकर्ताओं के आकर्षण का केंद्र

बीकानेर। बीकानेर रियासत के इतिहास, शाही परंपरा और कलात्मक विरासत को समझने में रियासतकालीन सिक्कों का विशेष महत्त्व है। महाराजा गंगासिंह जी के शासनकाल से जुड़े सिक्के आज भी इतिहास प्रेमियों, सिक्को के संग्रहकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन सिक्कों पर अंकित चित्र, अभिलेख और मूल्यवर्ग तत्कालीन बीकानेर रियासत की मुद्रा व्यवस्था तथा उस दौर की ऐतिहासिक परिस्थितियों की झलक प्रस्तुत करते हैं।

सिक्को का संग्रह और अध्ययन करने वाले के प्रसिद्ध मुद्राशास्त्री बीकानेर के सुधीर लुणावत के अनुसार, महाराजा गंगासिंह जी के शासनकाल से संबंधित सिक्कों की विशेषता उनकी बनावट, ऐतिहासिक महत्ता और विशिष्ट पहचान में निहित है। इन मुद्राओं में ब्रिटिश भारत के दौर की छाप के साथ बीकानेर रियासत की अपनी राजकीय पहचान भी दिखाई देती है।

चांदी के रुपये से लेकर तांबे के सिक्कों तक की विशिष्ट पहचान

लुणावत के अनुसार, वर्ष 1894, 1895 और 1897 से संबंधित बीकानेर रियासत के सिक्के संग्रह की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं। इनमें चांदी का एक रुपये का सिक्का तथा तांबे के एक पाव आना और आधा पैसा मूल्यवर्ग के सिक्के शामिल हैं। इन सिक्कों पर तत्कालीन मुद्रा व्यवस्था और रियासत की पहचान से जुड़े अभिलेख देखने को मिलते हैं।

चांदी के एक रुपये के सिक्के के एक ओर महारानी विक्टोरिया का चित्र, जबकि दूसरी ओर बीकानेर रियासत से संबंधित अभिलेख अंकित है। तांबे के सिक्कों पर भी महारानी विक्टोरिया का चित्र तथा दूसरी ओर मूल्यवर्ग और बीकानेर स्टेट का उल्लेख मिलता है। इनकी बनावट और अभिलेख इन्हें सामान्य मुद्रा से अलग ऐतिहासिक दस्तावेज का स्वरूप प्रदान करते हैं।

गोल्डन जुबली का नजराना रुपया बना खास पहचान

महाराजा गंगासिंह जी के शासनकाल से संबंधित मुद्राओं में वर्ष 1937 की स्वर्ण जयंती से जुड़ा नजराना रुपया विशेष महत्त्व रखता है। महाराजा के राज्यारोहण की स्वर्ण जयंती के अवसर से संबंधित इस सिक्के पर उनका चित्र अंकित है। इसे गंगासाही रुपये के नाम से भी जाना जाता है।

इस विशिष्ट मुद्रा के अतिरिक्त स्वर्ण जयंती के अवसर से जुड़ी सोने की मोहर और आधी मोहर भी बीकानेर रियासत की ऐतिहासिक मुद्राओं में उल्लेखनीय स्थान रखती हैं। इन सिक्कों में राजकीय प्रतिष्ठा, स्मरणीय अवसर और तत्कालीन सिक्का निर्माण की कलात्मक परंपरा का परिचय मिलता है।

सिक्के धातु नहीं, इतिहास के दस्तावेज

सुधीर लुणावत के अनुसार, पुराने सिक्कों का महत्त्व केवल उनकी धातु या संग्रहणीयता तक सीमित नहीं है। सिक्कों पर अंकित चित्र, लेख, तिथि और मूल्यवर्ग किसी समय विशेष की राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को समझने में मदद करते हैं। यही कारण है कि रियासतकालीन मुद्राओं का अध्ययन इतिहास के कई महत्त्वपूर्ण पहलुओं को सामने लाता है।

महाराजा गंगासिंह जी के नाम और शासनकाल से संबंधित सिक्के बीकानेर की गौरवशाली विरासत के महत्त्वपूर्ण साक्षी हैं। उनकी जयंती के अवसर पर इन ऐतिहासिक मुद्राओं का स्मरण न केवल महाराजा के योगदान को याद करने का माध्यम है, बल्कि नई पीढ़ी को बीकानेर के समृद्ध इतिहास और मुद्राशास्त्रीय धरोहर से परिचित कराने का अवसर भी है।

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Gordhan Soni

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