
हिंदू पंचांग के अनुसार, एक साल में 4 नवरात्रि मनाई जाती है। इनमें से 2 गुप्त नवरात्रि होती है और 2 प्रकट। साल की सबसे पहली नवरात्रि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तिथि तक मनाई जाती है। चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2022) से ही हिंदू नववर्ष का आरंभ भी होता है। इस बार चैत्र नवरात्रि 2 से 10 अप्रैल तक मनाई जाएगी।
ज्योतिषियों के अनुसार, इस बार कोई भी तिथि क्षय नहीं होने ये नवरात्रि पूरे 9 दिन की रहेगी। नवरात्रि की शुरूआत में कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जो इसे और भी खास बना रहे हैं। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घट यानी कलश यानी कलश स्थापना की जाती है। घट स्थापना के बाद कई नियमों का पालन करना आवश्यक हो जाता है। नवरात्रि के 9 दिनों में रोज देवी के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है।
घट स्थापना 02 अप्रैल की सुबह 06:09 से 08:31 या 11:59 से 12:49 तक अभिजीत मुहूर्त में करना श्रेष्ठ रहेगा। सुबह 08:31 के बाद वैधृति योग होने के कारण कलश स्थापना या तो उससे पहले करें या अभिजीत मुहूर्त में।
नवरात्रि में माता दुर्गा के सामने नौ दिन तक अखंड ज्योत जलाई जाती है। यह अखंड ज्योत माता के प्रति आपकी अखंड आस्था का प्रतीक स्वरूप होती है। माता के सामने एक एक तेल व एक शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए।













