कांग्रेस के शासनकाल में अनके गैर जरूरी बनाये गये कानूनों को समाप्त करने अथवा उचित संशोधन करने हेतु निवेदन | हमारे लिये बहुत सौभाग्य की बात है कि आपके नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की केंद्रीय सरकार है स्वच्छता अभियान मेक इन इंडिया , सबका साथ – सबका विश्वास के साथ अनेकानेक योजनाओं का हम हृदय रो रामर्थन करते हैं और विश्व पटल पर भारत को सिरमौर बनाने के आपके रातत् प्रयासों पर गौरान्वित महसूस करते हैं श्रीमान जी , कांग्रेस पार्टी द्वारा अपने शासनकाल में तुष्टीकरण की राजनीति करते हुए और राष्ट्रीय सोच को दरकिनार कर संविधान में रामय – अरामय अनेक संविधान संशोधनों को कर अपने हित राधे गये जिनके दुष्परिणाम आज हमारा हिंदू रामाज व राष्ट्र भुगत रहा है । वैसे तो अनेक गैर जरूरी कानून वर्तमान में है परंतु कुछ ऐसे कानून हैं जिन्हें तत्काल समाप्त करने की अथवा आज की परिस्थितियों में संशोधन करने की परम आवश्यकता है । जैसे 1. घरेलू हिरसा व दहेज प्रताड़ना कानून मुस्लिम रामाज तो मुस्लिम पर्सनल लॉ व शरीयत चलता है परन्तु हिंदू समाज में इस कानून की वजह से आज विवाह उपरांत धड़ाधड़ परिवार टूट रहे हैं घर के बड़े बुजुर्गों को बुढ़ापे में बेवजह फंसा कर बदनामी व अकारण कष्टों को झेलना पड़ता है । रवयं सर्वोच्च न्यायालय अनेकों बार स्वीकार कर चुका है कि 65 % , 70 % मामले झूठे होते हैं और सरकार विहीन रामाज की लड़कियाँ व उसके घर वालों ने लड़के वालों को लूटने एवम् फंसाने का हथियार बना लिया है । अतः तत्काल संशोधन करें कि राक्षम अधिकारी द्वारा जांच किए बिना कोई भी कार्यवाही प्राकृतिक न्याय के खिलाफ व विधि विरुद्ध मानी जायेगी । 2. इसी तरह वर्तमान में एससी एसटी कानून न्याय शास्त्र का सिद्धांत है कि भले ही 100 अपराधी छूट जाये परन्तु एक भी निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए । इस सिद्धांत से सर्वोच्च न्यायालय ने उचित निर्णय दिया था कि बिना संपूर्ण जांच किये गिरफ्तारी मानव अधिकारों का उल्लंघन है । आपकी अगुवाई में में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के विरूद्ध राभी राजनीतिक दलों ने एससी / एसटी वोटों की खातिर न्याय का गला घोट कर शाहबानों प्रकरण की तरह सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को रद्द कर दिया । वोटों की राजनीति सब करते हैं परंतु स्वर्ण समाज के साथ यह कानून क्रूरता का है , मानव अधिकारों का उल्लंघन है । 3. वरिष्ठ नागरिकों के प्रति संविधान मान्यवर , वरिष्ठ नागरिक पूरा जीवन परिवार , समाज व राष्ट्र को समर्पित करने उपरांत जीवन के अंतिम पड़ाव पर जब होते हैं तो बेटे – बहू और शासन की जिम्मेवारी बनती है कि वे जीवन के अंतिम समय को सुख शांति से गुजारे । आज हालात यह है कि 90 % बुजुर्ग अकेले रहते हैं या वृद्धाश्रम जाना पड़ता है वरिष्ठ नागरिक कानून इतना लचीला व कमजोर है कि उनकी सुरक्षा व मान सम्मान की जगह घरेलू हिंसा , दहेज प्रताड़ना , SC / ST के झूठे मुकदमें बना कर फंसाया जाता है और प्रताड़ित किया जाता है भगवान राम के इरा देश में आज अधिकांश वरिष्ठ नागरिकों की दशा दयनीय है डर डर कर जीना उनकी मजबूरी है ।
4. जातिगत आरक्षण पिछड़े वर्ग के लिए संविधान में मात्र 10 वर्ष आरक्षण की व्यवस्था की गई थी । परन्तु आज तक यह सिलसिला वोटों के लालच में निरंतर चला आ रहा है । खास बात यह है कि कमजोर वर्ग को इसका लाभ SC / ST के लोगों में भी नहीं मिल रहा है । SC / ST का एक वर्ग जो कि सक्षम हो चुका है आज भी उन्हीं को इसका लाभ मिल रहा है एक तरफ आप ” मेक इन इंडिया ” एवम् ” आत्म निर्भर भारत ” की बात करते हैं और दूसरी तरफ योग्य लोगों की प्रतिभा का गला घोंट कर अयोग्य ( निकम्मे ) लोगों को बढ़ावा दे रहे हैं , क्या यह सरासर राष्ट्र के साथ धोखा नहीं है ? आज कोई भी सांसद या VIP अपना इलाज SC के डॉक्टर से क्यों नहीं करवाता है ? कृपया इस पर जरूर विचार करें । अतः आरक्षण जारी रखें , परन्तु जातिगत नहीं आर्थिक आधार पर ही होना चाहिए । 5. Please Remove Anti Hindu law : 1. Places of worship act 1991 2. National Commission for minorities act 1992 3. Wakf Board act 1995 ( Because , we want justice of 1947 partition of India ) 6. सांसद व विधायक बाबत कानून जब आप देश के सक्षम नागरिकों से सब्सिडी छोड़ने को कहते हैं तो इन मान्य जनों से क्यों नहीं ? जब भारत के प्रत्येक योग्य नागरिक को देश बलाने हेतु टैक्स देना जरूरी है तो इन सांसद / विधायकों को जबरदस्त सुविधाएं व साधन देने के बावजूद भी लाखों के भत्ते व तनख्वाह पर टैक्स क्यों नहीं है ? एक तरफ राष्ट्र महंगाई व बेरोजगारी से जूझ रहा है और दूसरी तरफ ये तथाकथित मान्य लोग व्यापारियों व उद्योगपतियों के खून पसीने से प्राप्त टैक्स पर मौज मस्ती करते हैं , क्या यह कर चोरी और अन्याय नहीं हैं ? कृषि आमदनी पर टैक्स क्यों नहीं – सारे भ्रष्टाचार में देश को खोखला करने की जड़ यही है । किसान के नाम पर बड़े लोग व राजनेता प्रतिवर्ष अपनी मकान की छत पर और हाथ की हथेली पर करोड़ों की कृषि आमदनी बत्ता कर केवल टैक्स ही नहीं बचाते अपितु भ्रष्टाचारी कृत्यों से प्राप्त रकम को सफेद कर लेते हैं साधारण आदमी को 05 लाख प्रति वर्ष की छूट है तो किसानों को आप 10 लाख की आय ” कर मुक्त ” कर देवें , तत्पश्चात् शेष आमदनी पर आयकर स्लेब से कर वसूल करें । इससे ब्लेकमनी खत्म होने के साथ राष्ट्र की आय बढ़ेगी और भ्रष्टाचार भी रुकेगा । आपके मान्य जनप्रतिनिधि जरूर नाराज होंगे परंतु यह आर्थिक क्रांतिकारी कदम होगा । कृपया उपरोक्त सभी तथ्यात्मक निवेदन पर गौर फरमा कर जनहित में संशोधन करावें , इतिहारा आपको याद करेगा ।
















