
पुराणों में और पौराणिक गाथाओं में प्रकृति की सभी वनस्पतियों को महत्वपूर्ण माना जाता है…. परंतु सभी में ‘तुलसी’ का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है…! संसार में केवल एकमात्र पौधा जिसे हम ‘मां’ कहकर संबोधित करते है। हर क्षेत्र में तुलसी की महिमा अनंत है तथा इनके बिना तो ठाकुर जी भी भोग स्वीकार नहीं करते !
विवाह जो की हमारे संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है…, उसमें मां तुलसी का विवाह करवाना अत्यंत पुण्यदायी साबित होता है!
कहा जाता है की स्वयं प्रभु नारायण…. शालिग्राम अवतार में अवतरित हो कर मां तुलसी के साथ विवाह रचाते है।
यह कार्यक्रम कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को गो धूली बेला में सम्पूर्ण विधि विधान द्वारा संपन्न कराया जाता है!
आप सभी को बताते हुए अत्यंत खुशी हो रही है की ऐसा ही एक पुण्यदायी कार्यक्रम पवनपुरी(A-55 करनी नगर) स्थित हम सब के प्रिय गोपाल लाल जी कुकरा के पुत्र श्याम सुंदर सोनी ने सम्पूर्ण विधि विधान के साथ संपन्न कराया है!
यह तीन दिवसीय कार्यक्रम 3 से 5 नवंबर को संपन्न हुआ।
काफी समय से उनके मन में तुलसी विवाह जैसे पावन कार्य को करने की इच्छा थी…। उन्होंने अपनी इच्छा अपने परिवार जनों को बताई तो सब ने अत्यंत उत्साह सहित उनका इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग दिया और कार्यक्रम को सफल बनाया !
3 नवंबर को कार्यक्रम की शुरुआत इंद्रबाईसा महाराज के गुणगान जैसे पुनीत कार्य से हुई…जिससे कार्यक्रम की शोभा में और निखार आगया।
4 नवंबर को प्रभु शालिग्राम जी ब्राह्मण कुल के निज निवास से वर स्वरूप में गाज़े-बाज़े सहित बारात लेकर आए और मां तुलसी के साथ फेरे लिए एवं मंगल गीतों के साथ विवाह संपन्न किया।
5 नवंबर को द्वादशी उद्यापन और प्रतिभोज का कार्यक्रम सभी परिवारजनों की उपस्थिति में पूर्ण हुआ।
सभी ने इस कार्यक्रम में अपनी अहम भूमिका निभाई और इस पावन,पुनीत कार्य को संपन्न किया।
कार्यक्रम में श्री गोपाल लाल जी, मांगीलाल जी, श्यामसुंदर जी,श्रवण जी,नारायण,कृष्णा और समस्त परिवारजन शामिल थे जिन्होंने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
















