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संभागीय आयुक्त व पुलिस महानिरीक्षक ने किए भांडाशाह व लक्ष्मीनाथ मंदिर के दर्शन…
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चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास के किया अभिनंदन
बीकानेर, 21 दिसम्बर। संभागीय आयुक्त नीरज.के.पवन व पुलिस महानिरीक्षक बीकानेर रैंज ओम प्रकाश ने बुधवार को करीब छह शताब्दी प्राचीन भांडाशाह जैन मंदिर, भगवान नेमीनाथ मंदिर तथा नगर सेठ के रूप में विख्यात लक्ष्मीनाथ जी के मंदिर में दर्शन किए तथा मंदिर के इतिहास, धार्मिक महत्व व मान्यता, मंदिर की वास्तु व शिल्पकला की दिलचस्पी के साथ जानकारी हासिल की। दोनों अधिकारियों ने भांडाशाह जैन मंदिर के ऊपरी मंजिल पर चढ़कर शहर का विंहगम दृश्य देखा तथा खुशी महसूस की ।
श्री चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास के मंत्री चन्द्र सिंह पारख, उपाध्यक्ष नरपत सेठिया, श्री खरतरगरच्छ संघ के अध्यक्ष अजीत सिंह खजांची, प्रमुख उद्योगपति जयचंद लाल डागा, लीलम सिपानी, इंजीनियर अशोक पारख, कोचर मंदिरात व पंचायती ट्रस्ट के अध्यक्ष किशोर कोचर, सुरेन्द्र, अजय खजांची आदि जैन समाज के गणमान्य व प्रतिष्ठित लोगों व विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने दोनों अतिथियों का शॉल, माला आदि से अभिनंदन किया। श्री चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास के अध्यक्ष चन्द्र सिंह पारख ने बताया कि भगवान सुमतिनाथजी व अन्य जैन तीर्थंकरों के इस मंदिर में सेठ भाड़ाशाह ने नींव में घी डलवाया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से संरक्षित इस मंदिर को मंदिर के निर्माता के नाम से भाड़ाशाह जैन मंदिर के नाम से भी खूब प्रसिद्धि मिली हैं । भूमि से करीब 168 फीट ऊंचाई पर स्थापित मंदिर की ध्वजाएं शहर के अनेक इलाकों, गंगाशहर, भीनासर, सुजानदेसर तक नजर आती है। मंदिर में प्राचीन जैन मिनिएचर पेंटिंग, परिक्रमा में प्रतिकाएं हर आने वाले को आकर्षित करती है। भगवान नेमिनाथ के प्राचीन मंदिर के बारे में उद्योगपति लीलम सिपानी ने बताया कि नेमिनाथ, भगवान पार्श्वनाथ के साथ उनके परिजनों की ओर से सम्मेद शिखरजी का मंदिर में भी नियमित अनेक श्रावक-श्राविकाएं दर्शन करने आते है। पुरातत्व व धार्मिक दृष्टि से दोनों मंदिरों का अत्यधिक महत्व है।
दोनों अधिकारियों ने बीकानेर के लक्ष्मीनाथ मंदिर, पुराने गढ़, गढ़ गणेश मंदिर के भी दर्शन किए तथा जैन व सनातन धर्म के मंदिरों को बीकानेर की धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि सरकार अपने प्रयास व प्रयत्न से इस धरोहर को संरक्षित व सुरक्षित रखने का प्रयास कर रही है। भामाशाहों व दानदाताओं को चाहिए कि इन मंदिरों के वैभव को बनाए रखने में अपना योगदान दें।

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