

छोटी काशी बीकानेर की पावन धरा के स्थानीय पारीक चैक स्थित रामनाथ सदन में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के तृतीय दिवस की कथा का शुभारंभ आज व्यासपीठ व रामचरितमानस की पौथी के पूजन से प्रारंभ हुआ। आज के यजमान रमेश कुमार मल्ल ने व्यासपीठ व रामचरितमानस की पुस्तक का विधिवत् वृंदावन से पधारे विक्रम जी के आचार्यत्व में पूजन किया।
प्रेस-विज्ञप्ति जारी करते हुए श्रीराम कथा समिति के मंत्री जगदीश कोठारी ने बताया कि आज की कथा के प्रथम सत्र में व्यासपीठ वृंदावन प्रमुख संत श्री भरत शरण जी महाराज ने राम-लक्ष्मण-भरत-शत्रुघ्न की बाललीलाओं का वर्णन किया और उन्होंने राम-लक्ष्मण का विश्वामित्र आश्रम में अल्पकाल में विधा प्राप्त करने का प्रेरक प्रसंग की कथा का बहुत ही अमृतमय एवं सरल भाषा में रसावादन करवाकर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं मध्यावधि विश्राम के बाद राम-लक्ष्मण द्वारा विश्वामित्र यज्ञ की रक्षा, ताड़का वध, मारिच वध, अहिल्या उद्धार आदि की कथा का विस्तार से वर्णन किया।
सेवा समिति कार्यक्रम संयोजक नारायण डागा व समिति उपाध्यक्ष घनश्याम कल्याणी ने संयुक्त जानकारी देते हुए बताया कि इस अवसर पर महाराज श्री ने विशेष प्रकाश डालते हुए वर्तमान युवा पीढ़ी द्वारा सनातन धर्म को छोड़कर जो 25 दिसम्बर का दिन क्रिशमिश-डे के रूप में मनाया जाता है उसको न मनाने की सलाह देते हुए सनातन धर्म अनुसार 14 फरवरी को मातृ-पितृ दिवस व 25 दिसम्बर को तुलसी पूजन दिवस का महत्त्व बताया, उन्होंने बताया कि इन दोनों दिवस पर सनातन धर्म एवं संस्कृति के अनुसार इनका विशेष महत्त्व है। अतः सभी सनातन धर्म प्रेमियों को आज की युवापीढ़ी को इस दोनों दिवस का महत्त्व समझाते हुए सनातन धर्म की रक्षा के लिए प्रेरित करने का आग्रह करते हुए माता-पिता की पूजा व तुलसी माता की पूजा करने का संदेश दिया।
श्रीराम कथा सेवा समिति के कार्यक्रम संचालक याज्ञवल्क्य दम्माणी व सदस्य पवन राठी ने अधिक जानकारी देते हुए बताया कि कथास्थल पर नियमित बढ़ते श्रोताओं को देखते हुए कथास्थल पर आगन्तुक श्रोताओं के लिए अलग से पूर्ण व्यवस्थाऐं की जा रही है। महाराज भरत शरण जी ने अपनी कथा के अन्तर्गत एक भजन ‘‘चली कैसी गंगा धीरे-धीरे, पहाड़ों से आये धीरे-धीरे, बसाये गए इत शहर धीरे-धीरे, मेरी भी ले ले खबर धीरे-धीरे, सुलझाये कष्ट धीरे-धीरे, चली कैसी गंगा धीरे-धीरे’’ सुनाकर पूरे पण्डाल को भक्तिमय बना दिया तथा इस भजन को सुनकर उपस्थित भगवत् प्रेमियों ने नृत्य करते हुए अपनी भावनाओं को प्रकट किया।
समिति कोषाध्यक्ष सुशील दम्माणी के अनुसार श्रीराम कथा सेवा समिति द्वारा रामकथा सुनने वाले श्रोताओं के लिए समिति की ओर से मध्यावधि विश्राम में चाय-काॅफी एवं जलपान की पूर्ण व्यवस्था की गई है। इन व्यवस्थाओं में मुख्य रूप से गोवर्धन दम्माणी, मदन मोहन डागा, कमल राठी, उमाशंकर राठी, पियुष राठी, नारायण मीमाणी, पवन राठी, अभिषेक मंत्री आदि सक्रिय समिति सदस्यों एवं कार्यकत्र्ताओं ने अपना विशेष सहयोग प्रदान किया।















