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डॉ. टैस्सीटोरी महान् कर्मयोगी एवं भारतीय आत्मा थे-रंगा

तीन दिवसीय ओळू समारोह का आगाज हुआ

बीकानेर 13 दिसम्बर, 2023
राजस्थानी पुरोधा डॉ. लुईजि पिऔ टैस्सीटोरी असल में भारतीय आत्मा थे, वे बचपन से ही भारतीय संस्कृति और सभ्यता के संदर्भ में बातें करते थे। यही कारण रहा कि उनका जन्म इटली के उदिने शहर में हुआ। परन्तु उनकी कर्म-स्थली बीकाणा शहर रही, वे महान् कर्मयोगी थे।

यह उद्गार आज प्रातः टैस्सीटोरी की समाधि स्थल पर आयोजित उनकी 136वीं जयंती पर पुष्पांजलि एवं शब्दांजलि कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजस्थानी के वरिष्ठ कवि कथाकार एवं राजस्थानी मान्यता आंदोलन के प्रवर्तक कमल रंगा ने व्यक्त किए।

कमल रंगा ने आगे कहा कि डॉ. टैस्सीटोरी कुशल संपादक महत्वपूर्ण भाषाविद् एवं उच्च स्तर के पुरातत्वविद् तो थे ही साथ ही वे राजस्थानी भाषा मान्यता के प्रबल समर्थक रहे हैं। ऐसी स्थिति में राजस्थानी भाषा को प्रदेश सरकार दूसरी राजभाषा बनाकर एवं केन्द्र सरकार संवैधानिक मान्यता प्रदान कर डॉ. टैस्सीटोरी को सच्ची श्रृद्धांजलि दे। क्योंकि यह करोड़ों लोगों की अस्मिता-जनभावना एवं पहचान का सवाल है।

आयोजन के मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाज सेवी एवं कवि नेमचन्द गहलोत ने कहा कि डॉ. टैस्सीटोरी के द्वारा दी गई राजस्थानी सेवाओं को कभी भुलाया नहीं जा सकता। यह भी सुखद है कि आयोजक संस्था गत 45 वर्षांे से टैस्सीटोरी के व्यक्तित्व और कृतित्व को जन-जन तक पहुंचाने का सकारात्मक प्रयास कर रही है। इसके लिए वह साधुवाद की पात्र है।

समारोह के विशिष्टि अतिथि वरिष्ठ शायर इस्हाक गौरी ‘शफ़क’ ने कहा की राजस्थानी को शीघ्र मान्यता मिलनी चाहिए जो उसका वाजब हक है। डॉ. टैस्सीटोरी समाधि-स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करते हुए इस महत्वपूर्ण स्थान का सौंदर्यकरण शीघ्र होना चाहिए।

वरिष्ठ साहित्यकार मोहन थानवी ने कहा कि प्रज्ञालय संस्थान एवं राजस्थानी युवा लेखक संघ के सतत् प्रयासों से टैस्सीटोरी के महत्वपूर्ण कार्यो को जन-जन तक पहुंचाया गया है। जिसके लिए संस्था और कमल रंगा साधुवाद के पात्र है। आपने आगे कहा कि डॉ टैस्सीटोरी ने तुलसीदास एवं बाल्मिकी रामायण पर तुलनात्मक अध्ययन किया। साथ ही उन्होंने भारतीय दर्शन पर अनेक पत्रवाचन किए।

समारोह में वरिष्ठ शायर जाकिर अदीब ने कहा कि डॉ. टैस्सीटोरी बहुभाषाविद् थे, उन्होने अनेक ग्रंथों का सम्पादन किया। राजस्थानी मान्यता के लिए अलख जगाई। अतः अब शीघ्र मान्यता मिलनी चाहिए। सरकारें इस ओर ध्यान दें।

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Prakash Samsukha

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