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अयोध्या में जैनाचार्यों व साध्वीवृंद की धर्म चर्चा

बीकानेर के जैनाचार्य श्रीपूज्यजी सुनाया मंगलपाठ
बीकानेर, 23 जनवरी। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ के दादा गुरुदेवों की पट्ट परम्परा के खरतरगच्छाधिपति जैनाचार्य जिनचन्द्र सूरि श्रीपूज्यजी ने मंगलवार को अयोध्या में जैन श्वेताम्बर तपागच्छ के आचार्यश्री धर्मधुरन्धरजी, सुशील मुनि समुदाय की साध्वीश्री दीप्ति व लक्षिताश्री व सनातन धर्मावलम्बी रमेश भाई सहित अनेक संत महा महात्माओं से धर्म चर्चा की । श्रीपूज्यजी सोमवार को अयोध्या में श्री राम लला की प्रतिमा समारोह में शामिल हुए तथा नवकार महामंत्र व महा मांगलिक पाठ के साथ सबके लिए मंगलकामना की। श्रीपूज्यजी बीकानेर के एक मात्र जैनाचार्य थे जिन्होंने मुख्य समारोह में भागीदारी निभाई। ,
जैनाचार्य श्रीपूज्यजी व धर्मधुरन्धरजी व साध्वीवृ्रद ने बताया कि अयोध्या जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की चार कल्याणक व सहित जैन धर्म के 23 कल्याणक तीर्थ के रूप् में जाना जाता है। भगवान ऋषभदेव के ही वंशजश्री भगवान श्रीराम की जन्म भूमि सनातन ही नहीं जैन धर्मावलम्बियों के लिए भी आदर्श तीर्थस्थल के रूप् में प्रतिष्ठित है। अयोध्या के जिनालयों का भी जीर्णोंद्धार व विकास होने से धर्म की प्रभावना बढ़ेगी। चर्चा में बताया गया कि परमात्मा ऋषभदेव ने 400 दिनों ंके उपवास के बाद अपने पौत्र श्रेयांस के हाथ से इक्षु रस (गन्ने का रस) से पारणा किया। तभी से उनके वंश का नाम इक्ष्वाकु कुल पड़ा। कालान्तर में इसी इक्ष्वाकु वंश की यशो धवल परम्परा में भगवान श्रीराम जन्म हुआ। भगवान राम इक्ष्वाकु कुल के वंश थे। ऋषभदेव ने असि,मसि व कृषि का ज्ञान देकर मानव सभ्यता के विकास का सूत्रपात किया। उनके वंशज न्याय व समता आधारित राज्य व्यवस्था स्थापित की जो ेआज भी राम राजय के रूप् में आदर्श राज्य व्यवस्था है।
श्रीपूज्यजी ने बताया कि भगवान श्रीराम शलाका पुरुष थे, जिन्होंने अंत में संन्यास लिया एवं कर्म बंधन काटकर मोक्ष की प्राप्ति की। भगवान राम भारतीय धर्म व संस्कति के उज्जवल नक्षत्र है जो सभी भारतीय धर्म व संस्कृति में सर्वमान्य है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर में मूर्ति प्रतिष्ठा से धर्म की प्रतिष्ठा हुई । श्रीपूज्यजी ने अपने संदेश में कहा कि स्व के सत्य में रम रहा सतत राम (राम का नाम सत्य), मन भी बने, मंदिर सा पावन, समता जागे, मुक्त हो राग-द्वेष, दुर्भाव, अंतर में हो प्रेम-शांति-सद्भाव की संपदा का दिव्य वैभव तब ही जन्म जीवन निहाल । उन्होंने सबक मंगल, मैत्री भाव व खुशहाली की कामना की।
जैनाचार्य जिन चन्द्र सूरिश्वर ’’श्रीपूज्यजी’’ विश्व हिन्दू परिषद के विशेष आमंत्रण पर अयोध्या रामलला की प्रतिमा के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए थे। सत्य साधना प्रेरक श्रीपूज्यजी का अयोध्या में हनुमानगढ़ी मठ के जगदीश महंत, स्वयं सेवक संघ के अध्यक्ष विजय, विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष राजाराम सहित अनेक प्रतिष्ठितजनों ने स्वागत किया।

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दिलीप गुप्ता

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