*विद्यार्थी वैश्विक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए करे नये प्रयोग – डॉ. आर. सी. अग्रवाल*
बीकानेर, 5 फरवरी। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर में सोमवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के उप महानिदेशक (कृषि शिक्षा) डॉ. आर.सी. अग्रवाल ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को किताबों के अध्ययन के साथ-साथ वैश्विक चुनौतियों को भी ध्यान में रखकर नए अनुसंधान करने चाहिए। जिससे आने वाले 10 वर्षों में उन्नत प्रौद्योगिकी एवं तकनीकों का प्रयोग करते हुए पैदावार को बढ़ाया जा सके।
उन्होंने कुलपति डॉ. अरुण कुमार, अनुसंधान निदेशक डॉ. पी. एस. शेखावत, प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. सुभाष चन्द्र, वित्त नियंत्रक बी. एल. सर्वा तथा क्षेत्रीय निदेशक डॉ. एस. आर. यादव के साथ कृषि अनुसंधान केंद्र का भ्रमण कर बीकानेर की जलवायु परिस्थितियों में गेहूं में बुवाई समय एवं उपयुक्त किस्मों पर किए जा रहे अनुसंधान प्रयोग, रिजके की कृष्णा किस्म जो कि कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर की ही देन है, के बीज उत्पादन को बढ़ाने, चना, मेथी, गेहूं एवं जौ में फसल संरक्षण के प्रयोग एवं प्याज की फसल में ऊन अपशिष्ट के जैविक खाद के रूप में उपयोग संबंधित प्रयोगों का अवलोकन किया। अनुसंधान निदेशक डॉ. पी. एस. शेखावत ने बताया कि ऊन अपशिष्ट में सल्फर की मात्रा अत्यधिक होती है जिसके कारण प्रति हेक्टेयर प्याज उत्पादन से 2 लाख रुपए तक की आय ली जा सकती है। डॉ. अग्रवाल ने कृषि महाविद्यालय में मशरूम इकाई का अवलोकन किया तथा बीकानेर की परिस्थितियों में बटन मशरूम का उत्पादन तथा मटके में ढिंगरी मशरूम देख प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय में मरू शक्ति एग्रो इनोवेटिव फूड्स इकाई का अवलोकन कर बाजरे के मूल्य संवर्धित उत्पादों की सराहना की।
इस दौरान डॉ. पी.के. यादव, डॉ. दाता राम, डॉ. विमला डूकवाल आदि उपस्थित रहे।
संवाद कार्यक्रम के दौरान डॉ. आई. पी. सिंह ने एक और गर्ल्स हॉस्टल की मांग रखी।














