Bikaner Live

*वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादकीय लेखक राकेश वशिष्ठ “विद्या वाचस्पति” सारस्वत (डॉक्टरेट) की मानद उपाधि से सम्मानित।*

पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिन्दी विद्यापीठ के वार्षिक साहित्यकार संगोष्ठी समारोह में जोधपुर राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादकीय लेखक राकेश वशिष्ठ को विभिन्न क्षेत्र पत्रकारिता,लेखन ,साहित्य,महिला सशक्तिकरण और शिक्षा के विकास एंव उत्थान के लिए “विद्या वाचस्पति” सारस्वत (डॉक्टरेट) की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
वृन्दावन धाम मथुरा में आयोजित कार्यक्रम में देश भर के लब्ध प्रतिष्ठित शिक्षाविद और साहित्यकारों ने भाग लिया था। पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ के कुलपति डॉ इंदु भूषण मिश्र “देवेंदु” ने बताया कि विद्यापीठ की प्रबंध समिति की अनुशंसा पर श्री राकेश वशिष्ठ का चयन किया गया। “विद्या वाचस्पति” सारस्वत (डॉक्टरेट) की मानद उपाधि का यह सम्मान राकेश वशिष्ठ को उनके द्वारा पत्रकारिता, ,साहित्य सृजन, महिला सशक्तिकरण और शिक्षा के विकास एंव उत्थान के लिए के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों के आधार पर पं. दीनदयाल उपाध्याय हिन्दी विद्यापीठ की प्रबन्ध कार्यकारिणी की अनुशंसा और निर्णय के आधार पर विद्यापीठ के कुलपति डॉ इन्दु भूषण मिश्र “देवेन्दु” द्वारा प्रदान किया गया। राकेश वशिष्ठ वर्तमान में जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया में राजस्थान प्रदेश संयोजक पद पर कार्यरत हैं साथ ही अनेक धार्मिक, सामाजिक और राजनैतिक सगठनों में सक्रिय पदाधिकारी है।
राकेश वशिष्ठ की हिंदी भाषा पर पकड़ और विशुद्ध हिंदी में शाब्दिक चयन, भाषा के अर्थ की गहराई बेजोड़ है विभिन्न दैनिक समाचार पत्रों पत्रिकाओं में विभिन्न राजनैतिक, सामाजिक ,धार्मिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर इनके प्रेरणास्पद आलेख प्रतिदिन प्रकाशित होते रहते हैं वशिष्ठ अच्छे कवि भी है आपके आलेख विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्पद और ऊर्जा के स्रोत पर्याय होते हैं। इन सभी के मद्देनजर हमने राकेश वशिष्ठ का चयन “विद्या वाचस्पति सारस्वत”(डॉक्टरेट) की मानद उपाधि से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया है।
इसी बीच राकेश वशिष्ठ ने सम्मान ग्रहण करने के पश्चात् धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि पं दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ की प्रबंध समिति के सभी सदस्यों और कुलपति डॉ इंदु भूषण मिश्र जी का आभारी रहूंगा जो आप सभी ने मुझे इस सम्मान के योग्य समझा राकेश वशिष्ठ ने कहा हिंदी भाषा भारत की मातृ भाषा और भारत में आम जन मानस के मध्य भाषा के संवाद को स्थापित करने वाली सबसे ज्यादा बोली जाने वाली सबसे सरल और लोकप्रिय बोली है जो आज अपने अस्तित्व को लेकर संघर्ष कर रही है हम सभी को एकजुट हो हिंदी को पुनः लोकप्रिय बनाना होगा। भारत के प्रत्येक राज्य सरकार को हिंदी को राष्ट्रभाषा भाषा के साथ साथ राज्य भाषा घोषित करने की पहल करनी होगी हिंदी भाषा के अधिकाधिक लेखन और बोलने के प्रयोग से ही हम अपनी मातृ भाषा के अस्तित्व को बचा सकते हैं। राकेश वशिष्ठ की इस सारस्वत उपलब्धि पर प्रदेश के समाजसेवियों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों एवं पत्रकारों ने बधाई दी है।

Picture of दिलीप गुप्ता

दिलीप गुप्ता

खबर

http://

Related Post

error: Content is protected !!